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    ड्रोन की अफवाहों से ग्रामीण अंचलों में अनिश्चितता का माहौल, प्रशासन ने सतर्कता बरतने की दी सलाह

    गोरखपुर। जनपद के ग्रामीण इलाके इन दिनों एक अदृश्य और अशरीरी डर का सामना कर रहे हैं। ड्रोन जैसी अज्ञात उड़न वस्तुओं की अफवाहों ने गाँव-गाँव में एक ऐसी दहशत फैला दी है, जिसने लोगों की रातों की चैन और दिन का सुकून छीन लिया है। अफ़वाहों की इस आँधी के बीच ग्रामीण स्वयं अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालते नजर आ रहे हैं, वहीं पुलिस प्रशासन ने अभी तक ऐसी किसी गतिविधि की पुष्टि नहीं की है और लोगों से सतर्क रहने के साथ-साथ अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।



    रातों में सिमट गई नींद, दिन में दिखती है थकान


    बीते कुछ दिनों से जनपद के कई गाँवों में ड्रोन जैसी किसी चीज के देखे जाने की खबरें तेजी से फैली हैं। ये खबरें इतनी प्रबल हैं कि लोगों ने रातभर जागकर पहरा देने की प्रथा शुरू कर दी है। ग्रामीण अब चैन की नींद सोना भूल चुके हैं। उनकी नींद अब खेतों के किनारे, छप्परों के नीचे और घरों की छतों पर डटे रहने में ही सिमट कर रह गई है। हाथ में लाठी-डंडा और कभी-कभी टॉर्च लिए, लोग समूह बनाकर अपने खेत-खलिहानों और आवासीय इलाकों की निगरानी करते देखे जा सकते हैं। इसका सीधा असर उनके दिन के काम-काज और सेहत पर पड़ रहा है। चेहरों पर थकान और आँखों में नींद की कमी साफ झलकती है।


    अफवाहों का असर: संदेह की नजर से देखा जाने लगा है आसमान


    ग्रामीणों का कहना है कि शुरुआत में यह चर्चा सिर्फ एक-दो गाँवों तक सीमित थी, लेकिन अब यह आसपास के दर्जनों गाँवों में फैल चुकी है। हर कोई आसमान की ओर संदेह भरी नजरों से देख रहा है। छोटी-सी आवाज या रात में किसी पक्षी की परछाई भी लोगों को संदिग्ध लगने लगी है। इस डर ने सामुदायिकता तो बढ़ाई है, लेकिन उसकी कीमत लोगों की मानसिक शांति से चुकाई जा रही है। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि उन्हें फिर से निश्चिंत होकर सोने का अवसर मिल सके।


    प्रशासन का रुख: 'अफवाहों पर न दें ध्यान, सूचना दें'


    इस पूरे मामले में पुलिस प्रशासन का रुख स्पष्ट और सतर्कता बरतने वाला है। जनपद के पुलिस अधीक्षक (उत्तरी) जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने इस संदर्भ में जनता से अपील करते हुए कहा है कि अभी तक ड्रोन जैसी किसी भी संदिग्ध गतिविधि की कोई पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और उन्हें फैलाने से बचें।


    एसपी नार्थ ने कहा, "लोगों से मेरी अपील है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें। अगर कहीं पर वास्तव में कोई संदिग्ध गतिविधि या ड्रोन जैसी कोई चीज दिखाई देती है, तो उसकी सूचना तत्काल अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन पर दें। हमारी टीमें लगातार सतर्क हैं और ऐसी किसी भी सूचना पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ कानूनन सख्त कार्रवाई की जाएगी।"


    क्या है आगे की राह?


    फिलहाल, स्थिति एक अजीबोगरीब द्वंद्व पैदा कर रही है। एक तरफ ग्रामीणों का डर बिल्कुल वास्तविक है, जो उनकी बेचैनी और अनिद्रा से साफ झलक रहा है। दूसरी ओर, प्रशासन के पास इस डर को दूर करने के लिए ठोस सबूतों का अभाव है। ऐसे में, सबसे जरूरी है दोनों पक्षों के बीच बेहतर संवाद और विश्वास।


    प्रशासन की ओर से गश्त बढ़ाने, ग्रामीणों से सीधा संपर्क बनाए रखने और किसी भी संदिग्ध सूचना पर तुरंत जाँच करने के प्रयासों से लोगों का विश्वास बढ़ेगा। साथ ही, ग्राम प्रधानों और स्थानीय नेताओं के माध्यम से लोगों को जागरूक करना और अफवाहों को रोकना भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। तभी गोरखपुर के ये गाँव एक बार फिर से शांति और चैन की नींद लौट सकेंगे।

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