• Breaking News

    दंगा भड़काने के आरोप में यूट्यूबर जुबैर अहमद उर्फ गाजी गिरफ्तार, पुलिस ने बताया बड़ा मास्टरमाइंड

     कानपुर पुलिस ने शहर में साम्प्रदायिक तनाव फैलाने और दंगा भड़काने की एक बड़ी साजिश का खुलासा करते हुए यूट्यूबर जुबैर अहमद उर्फ गाजी को गिरफ्तार किया है। पुलिस का दावा है कि जुबैर अहमद एक खतरनाक मास्टरमाइंड है, जो सोशल मीडिया के जरिए विवादित और नफरत फैलाने वाली सामग्री पोस्ट करके साम्प्रदायिक सौहार्द को नुकसान पहुँचाने का काम कर रहा था।



    कौन है जुबैर अहमद उर्फ 'गाजी'?


    जुबैर अहमद एक सोशल मीडिया एक्टिविस्ट और यूट्यूब चैनल चलाता था, जहाँ वह 'गाजी' के नाम से जाना जाता था। पुलिस के अनुसार, उसका तरीका यह था कि वह पहले किसी धार्मिक या सामाजिक मुद्दे पर भड़काऊ भाषण देता या विवादित वीडियो बनाता था। फिर उस वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर व्यापक रूप से शेयर किया जाता था, जिससे दो समुदायों के बीच गलतफहमी और तनाव पैदा होता था। उसके कई वीडियोस ऐसे थे जिनमें सीधे तौर पर दूसरे धर्म के लोगों के खिलाफ नफरत फैलाई जा रही थी।


    कैसे पकड़ा गया?


    पुलिस को शहर के विभिन्न इलाकों से सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार हो रही घटनाओं और तनाव की शिकायतें मिल रही थीं। साइबर सेल की एक विशेष टीम ने इन शिकायतों की जाँच शुरू की। डिजिटल फॉरेंसिक और टेक्निकल विश्लेषण के बाद, सभी सूत्र जुबैर अहमद की ओर इशारा कर रहे थे। उसके बाद, पुलिस ने उसके ठिकाने का पता लगाया और एक सटीक ऑपरेशन के तहत उसे गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के वक्त वह अपने एक सहयोगी के साथ था।


    क्या है आरोप?


    जुबैर अहमद के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की कई धाराएँ लगाई गई हैं। मुख्य आरोप इस प्रकार हैं:


    1. धारा 153-A (साम्प्रदायिक घृणा फैलाना): दो अलग-अलग समुदायों के बीच शत्रुता की भावना फैलाना।

    2. धारा 505 (जनसाधारण को भय या अलार्म देने वाले तथ्य प्रकाशित करना): झूठी अफवाहें फैलाना जिससे लोगों में डर पैदा हो।

    3. धारा 120-B (आपराधिक षड्यंत्र): दंगा भड़काने के लिए साजिश रचना।

    4. आईटी एक्ट की धारा 66F (साइबर आतंकवाद): डिजिटल माध्यम से आतंक फैलाने की कोशिश करना।


    पुलिस ने क्या बयान दिया?


    इस मामले में कानपुर के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, "जुबैर अहमद एक खतरनाक डिजिटल अपराधी साबित हुआ है। वह सोशल मीडिया का इस्तेमाल एक हथियार की तरह कर रहा था और जानबूझकर समाज में फूट डालने की कोशिश कर रहा था। हमने उसके कई डिवाइस जब्त किए हैं, जिनमें से बड़ी मात्रा में डाटा रिकवर किया गया है। हमें उम्मीद है कि इस गिरफ्तारी से शहर में शांति-व्यवस्था कायम रखने में मदद मिलेगी।"


    सोशल मीडिया कंपनियों की भूमिका पर सवाल


    यह मामला एक बार फिर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर नफरत भरे और विवादित कंटेंट की निगरानी न हो पाने पर सवाल खड़ा करता है। कई लोगों का मानना है कि अगर इन प्लेटफॉर्म्स ने समय रहते जुबैर अहमद के चैनल और कंटेंट पर रोक लगा दी होती, तो शायद उसका इतना नुकसान नहीं हो पाता। पुलिस का कहना है कि वह सोशल मीडिया कंपनियों से इस मामले में सहयोग माँग रही है।


    आगे की कार्रवाई


    जुबैर अहमद को कोर्ट में पेश किया गया है, जहाँ से पुलिस ने उसे रिमांड पर लेने की माँग की है। पुलिस का कहना है कि वह उसके डिजिटल फुप्रिंट्स का गहन विश्लेषण कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसके कोई और साथी तो नहीं हैं या उसने कोई बड़ा नेटवर्क तो नहीं बना रखा है। इस गिरफ्तारी को पुलिस की एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

    No comments

    Ad

    Abcd
    ad728