ग़ाज़ीपुर लाठीचार्ज कांड: सियाराम उपाध्याय की मौत से उठा सियासी तूफ़ान, CM योगी ने परिवार से की मुलाक़ात, SIT जांच पर सबकी निगाहें
ग़ाज़ीपुर।
गठिया गांव का वो काला दिन आज भी लोगों की आंखों में ताज़ा है, जब थाने के सामने धरना दे रहे ग्रामीणों पर अचानक लाठियां बरस पड़ीं। कहा जाता है कि रात गहराते ही थाने की लाइटें बुझा दी गईं और फिर पुलिस ने भीड़ पर धावा बोल दिया। इसी लाठीचार्ज में घायल हुए बीजेपी कार्यकर्ता और दिव्यांग सियाराम उपाध्याय की हालत इतनी बिगड़ी कि आखिरकार उन्होंने दम तोड़ दिया।
इस घटना ने न केवल परिवार को गहरा आघात दिया, बल्कि ग़ाज़ीपुर की राजनीति में भी भूचाल ला दिया। सियाराम की मौत के बाद पूरे इलाके में गुस्सा फूट पड़ा। वीडियो वायरल हुए, लोग सड़क पर उतरे और प्रशासन के खिलाफ नाराज़गी जताई।
CM योगी से मुलाक़ात
15 सितंबर को सियाराम का परिवार राजधानी लखनऊ पहुंचा। विधान परिषद सदस्य विशाल चंचल उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास ले गए। मुख्यमंत्री ने परिवार की पूरी बात ध्यान से सुनी और हरसंभव मदद का भरोसा दिया। उन्होंने कहा— “किसी निर्दोष के साथ अन्याय नहीं होगा, दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।”
मुख्यमंत्री के इस बयान ने परिवार को थोड़ी राहत दी, लेकिन आंसुओं से भरी आंखों में अब भी न्याय की प्यास साफ झलक रही थी।
प्रशासनिक कार्रवाई
घटना के बाद सरकार ने तुरंत सख्ती दिखाई। नोनहरा थाने के प्रभारी समेत छह पुलिसकर्मी निलंबित कर दिए गए, पांच अन्य को लाइन हाजिर कर दिया गया। साथ ही मजिस्ट्रेट जांच और SIT का गठन किया गया। यह संकेत था कि सरकार मामले को हल्के में नहीं लेना चाहती।
सियासी खेमेबंदी
इस घटना ने राजनीतिक हलचल भी तेज कर दी है।
भाजपा नेता इसे दुखद बताते हुए मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता का हवाला दे रहे हैं।
विपक्ष इसे प्रशासनिक नाकामी करार देकर सरकार पर हमले बोल रहा है।
स्थानीय संगठनों और छोटे दलों ने भी पीड़ित परिवार को समर्थन देना शुरू कर दिया है।
ग़ाज़ीपुर का यह मामला अब महज़ एक हादसा नहीं रहा, बल्कि सियासत का नया केंद्र बन चुका है।
SIT जांच पर टिकेगी तस्वीर
सबकी निगाहें अब SIT की रिपोर्ट पर हैं। क्या रिपोर्ट में पुलिस की गलती साबित होगी? क्या किसी बड़े अफसर की भूमिका सामने आएगी? या फिर पूरी कहानी किसी और दिशा में जाएगी? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में राजनीति की दिशा तय करेंगे।
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