गोरखपुर चिड़ियाघर की बाघिन मैलानी का निधन
लंबी बीमारी के बाद गई जान, कर्मचारियों और वन्यजीव प्रेमियों में शोक
गोरखपुर। शहीद अशफाक उल्लाह खान प्राणी उद्यान (गोरखपुर चिड़ियाघर) से एक दुखद खबर सामने आई है। चिड़ियाघर की सबसे लोकप्रिय और पहली बाघिन ‘मैलानी’ का बुधवार को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनकी मौत से चिड़ियाघर के कर्मचारियों और वन्यजीव प्रेमियों में गहरा शोक फैल गया है।
पशु चिकित्सा अधिकारी के अनुसार, मैलानी पिछले कई महीनों से अस्वस्थ चल रही थीं। अधिक उम्र और बर्ड फ्लू संक्रमण के कारण उनके पाचन तंत्र, किडनी और लिवर ने काम करना लगभग बंद कर दिया था। पिछले छह महीने से उनका इलाज लगातार चल रहा था। IVRI बरेली और कुमारगंज अयोध्या के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम निगरानी कर रही थी, लेकिन सभी प्रयास असफल रहे।
जनवरी 2021 में लखनऊ से लाई गई मैलानी ने करीब चार वर्षों तक गोरखपुर चिड़ियाघर के मुख्य बाड़े की शान बढ़ाई। उनकी गरज और शाही अंदाज देखने के लिए प्रतिदिन सैकड़ों पर्यटक आते थे। बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी की पहली नजर अक्सर बाघिन मैलानी पर ही जाती थी।
चिड़ियाघर के कर्मचारियों ने बताया कि मैलानी बहुत मिलनसार स्वभाव की थी और उसे हर दिन विशेष आहार दिया जाता था। एक कर्मचारी ने भावुक होकर कहा, “मैलानी हमारे परिवार का हिस्सा थी। उसकी गर्जना सुनकर लगता था जैसे चिड़ियाघर में जान आ गई हो।”
बुधवार को उसके निधन के बाद चिड़ियाघर में शोक सभा आयोजित की गई, जिसमें निदेशक, पशु चिकित्सक और सभी कर्मचारियों ने भाग लिया। निदेशक ने कहा कि “मैलानी का योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। उसने गोरखपुर चिड़ियाघर को पहचान दिलाई।”
मैलानी का शव वैज्ञानिक मानकों के अनुसार पोस्टमार्टम के लिए IVRI बरेली के दिशानिर्देशों पर भेजा गया। प्राथमिक जांच से पता चला है कि उनकी मृत्यु किडनी और लिवर फेल्योर से हुई।
मैलानी की उम्र लगभग 13 वर्ष बताई जा रही है, जबकि बाघिनों की औसत आयु 14–16 वर्ष होती है। उसकी मृत्यु से न केवल चिड़ियाघर में सन्नाटा पसर गया है, बल्कि वन्यजीव प्रेमियों में भी गहरा शोक है।
प्राणी उद्यान प्रशासन ने बताया कि मुख्य बाड़े को जल्द ही फिर से सक्रिय करने के लिए नई बाघिन लाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, हालांकि मैलानी की यादें लंबे समय तक लोगों के दिलों में जीवित रहेंगी।

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