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    इंदौर में दूषित पानी से हड़कंप: 5 लोगों की मौत, 40 से अधिक बीमार, प्रशासन पर गिरी गाज

    मध्य प्रदेश के इंदौर शहर, जिसे देश का सबसे स्वच्छ शहर होने का गौरव प्राप्त है, वहां दूषित पानी पीने से लोगों की मौत की खबर ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक घटना में अब तक 5 लोगों की मौत की बात सामने आ रही है, जबकि 40 से अधिक लोग गंभीर रूप से बीमार बताए जा रहे हैं। हालांकि राज्य सरकार ने आधिकारिक तौर पर अभी 3 मौतों की ही पुष्टि की है।



    घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई दिनों से नलों में गंदा और बदबूदार पानी आ रहा था, जिसकी शिकायतें नगर निगम और जल प्रदाय विभाग से की गई थीं, लेकिन समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसी लापरवाही का नतीजा आज जानलेवा साबित हुआ।



    मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने सख्त कदम उठाए हैं। जल प्रदाय से जुड़े 2 अधिकारियों को तत्काल निलंबित कर दिया गया है, जबकि एक अन्य अधिकारी की सेवा समाप्त कर दी गई है। इसके साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए 3 सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया है, जो दूषित पानी की वजह, जिम्मेदार अधिकारियों और व्यवस्था में हुई चूक की जांच करेगी।


    सरकार ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए प्रत्येक परिवार को 2–2 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की है। साथ ही बीमार लोगों के इलाज का पूरा खर्च राज्य सरकार द्वारा उठाए जाने का आश्वासन दिया गया है। प्रभावित क्षेत्र में मेडिकल टीमों को तैनात कर दिया गया है और घर-घर जाकर स्वास्थ्य जांच की जा रही है।


    मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी प्रभावित इलाके का दौरा किया। उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर हालात का जायजा लिया और अधिकारियों को साफ निर्देश दिए कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। मंत्री ने कहा कि इंदौर जैसे शहर में इस तरह की घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और भविष्य में ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


    प्रशासन ने एहतियातन प्रभावित इलाकों में पानी की सप्लाई बंद कर दी है और टैंकरों के जरिए स्वच्छ पानी की आपूर्ति शुरू की गई है। साथ ही पानी के सैंपल जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।


    यह घटना एक बार फिर बुनियादी सुविधाओं की निगरानी और जवाबदेही पर सवाल खड़े करती है। अब देखना होगा कि जांच समिति की रिपोर्ट के बाद सरकार दोषियों पर कितनी सख्ती से कार्रवाई करती है और पीड़ितों को कितना न्याय मिल पाता है।

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