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    अलीगढ़ में मिशन शक्ति व ‘बेटी बचाओ’ अभियान के बीच पुलिस की लापरवाही उजागर

    अलीगढ़। मिशन शक्ति और ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ जैसे अभियानों के बीच Uttar Pradesh Police की गंभीर लापरवाही एक बार फिर सामने आई है। IGRS पटल पर तैनात महिला सिपाही हेमलता की आत्महत्या के मामले में दो पुलिसकर्मियों की भूमिका उजागर होने के बाद विभागीय कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े हो गए हैं।



    जानकारी के अनुसार, रोरावर थाने में तैनात सिपाही कुलवीर बालियान और कासगंज में तैनात दारोगा संदीप कुमार पिछले कई महीनों से हेमलता पर मानसिक दबाव बना रहे थे। विभागीय जांच में सामने आया कि दोनों आरोपी लगातार हेमलता से संपर्क कर उसे परेशान करते थे। खासकर सिपाही कुलवीर द्वारा शादी के लिए लगातार दबाव डाला जा रहा था, जिस कारण हेमलता मानसिक रूप से अत्यधिक तनाव में थी।


    29 नवंबर की रात स्थिति और गंभीर हो गई, जब कुलवीर अचानक हेमलता के सरकारी आवास पर पहुंच गया। बताया जाता है कि उस दौरान भी उसने हेमलता पर विवाह के लिए दबाव बनाया और बहस की। पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह घटना हेमलता की मानसिक स्थिति पर गहरा प्रभाव डाल गई। इसी रात हेमलता ने तनाव और प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या कर ली।


    घटना सामने आने के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। शुरुआती जांच में दोनों पुलिसकर्मियों की बातचीत, मोबाइल चैट्स और हेमलता के बयाननुमा नोट्स जैसे कई महत्वपूर्ण पहलू सामने आए, जिनसे स्पष्ट हुआ कि मानसिक प्रताड़ना का सिलसिला लंबे समय से चल रहा था। इसके आधार पर दोनों आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।


    फिलहाल दोनों पुलिसकर्मी फरार बताए जा रहे हैं और उनकी गिरफ्तारी के लिए टीम गठित की गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसी भी स्तर पर महिला कर्मियों के साथ उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


    हेमलता की आत्महत्या ने एक बार फिर महिला पुलिसकर्मियों की सुरक्षा, कार्यस्थल पर उत्पीड़न और विभागीय निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मिशन शक्ति जैसी योजनाएं तभी प्रभावी हो सकती हैं, जब विभाग के भीतर भी महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। घटना के बाद से पुलिस विभाग पर लगातार दबाव है कि वह आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर न्याय सुनिश्चित करे।

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