मुख्यमंत्री राहत कोष के सहयोग से AIIMS गोरखपुर में कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी सफल
मुख्यमंत्री राहत कोष के सहयोग से AIIMS गोरखपुर के ईएनटी विभाग द्वारा 12 जनवरी (सोमवार) को एक कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। यह सर्जरी गोरखपुर निवासी एक 4 वर्षीय श्रवण बाधित बच्चे पर की गई, जो जन्म से ही सुनने में असमर्थ था। इस सफल सर्जरी से बच्चे और उसके परिवार को नई उम्मीद मिली है।
जानकारी के अनुसार, बच्चे में प्रारंभिक अवस्था में हियरिंग एड का ट्रायल किया गया था, लेकिन अपेक्षित लाभ न मिलने के कारण चिकित्सकों द्वारा कॉक्लियर इम्प्लांट की सलाह दी गई। कॉक्लियर इम्प्लांट की कुल लागत लगभग 6 लाख रुपये है, जिसमें से आधी राशि मुख्यमंत्री राहत कोष से आंशिक वित्तीय सहायता के रूप में प्राप्त हुई, जबकि शेष खर्च बच्चे के परिवार द्वारा स्वयं वहन किया गया। इस आर्थिक सहयोग से परिवार पर पड़ने वाला बड़ा वित्तीय बोझ काफी हद तक कम हुआ।
यह जटिल सर्जरी डॉ. पंखुड़ी मित्तल, असिस्टेंट प्रोफेसर, ईएनटी विभाग, AIIMS गोरखपुर द्वारा डॉ. मोनिश ग्रोवर, प्रोफेसर ईएनटी, एसएमएस मेडिकल कॉलेज, जयपुर के विशेषज्ञ मार्गदर्शन में संपन्न की गई। सर्जिकल टीम में डॉ. नैन्सी (सीनियर रेज़िडेंट) एवं ज्योति (नर्सिंग ऑफिसर) शामिल रहीं। वहीं एनेस्थीसिया टीम में डॉ. सीमा एवं डॉ. अंकिता (सीनियर रेज़िडेंट) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. रुचिका अग्रवाल ने बताया कि कॉक्लियर इम्प्लांट गहन श्रवण बाधित बच्चों के लिए एक क्रांतिकारी तकनीक है। यह तकनीक बच्चों में सुनने की क्षमता विकसित करने के साथ-साथ भाषा, वाक् विकास, सामाजिक समावेशन और शैक्षणिक प्रगति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
वहीं डॉ. अश्वनी चौधरी, एसोसिएट प्रोफेसर, ईएनटी ने श्रवण हानि की शीघ्र पहचान और समय पर पुनर्वास (रिहैबिलिटेशन) के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि प्रारंभिक पहचान और सही उपचार से बच्चों में बेहतर श्रवण क्षमता एवं भाषा विकास के उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
AIIMS गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल डॉ. विभा दत्ता ने सफल सर्जरी के लिए पूरी चिकित्सा टीम को बधाई दी और कहा कि यह उपलब्धि संस्थान की उन्नत चिकित्सा सेवाओं और सामाजिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
इसके साथ ही जन-जागरूकता एवं क्षमता निर्माण के उद्देश्य से 8 जनवरी को AIIMS गोरखपुर में कॉक्लियर इम्प्लांटेशन पर एक सतत चिकित्सा शिक्षा (CME) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस CME में श्रवण हानि की शीघ्र पहचान, कैंडिडेसी, रेडियोलॉजिकल मूल्यांकन, सर्जिकल प्रबंधन एवं पोस्ट-इम्प्लांट पुनर्वास जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।
CME कार्यक्रम में डॉ. मोनिश ग्रोवर, डॉ. आशिमा सक्सेना (कंसल्टेंट ईएनटी एवं कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जन, हरियाणा) तथा डॉ. शालिनी सिंह (स्पीच-लैंग्वेज पैथोलॉजिस्ट, गोरखपुर) बतौर वक्ता शामिल रहीं। कार्यक्रम में ईएनटी विशेषज्ञों, ऑडियोलॉजिस्ट्स, स्पीच-लैंग्वेज पैथोलॉजिस्ट्स एवं रेज़िडेंट डॉक्टरों ने भाग लिया। वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि समय पर कॉक्लियर इम्प्लांटेशन और संरचित पुनर्वास बच्चों के जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार ला सकता है, जिससे AIIMS गोरखपुर की वंचित क्षेत्रों के बच्चों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की प्रतिबद्धता और अधिक सुदृढ़ होती है।


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