• Breaking News

    अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, गोरखपुर में “आप कैसे सोचते हैं?” विषय पर सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम आयोजित

    गोरखपुर, 14 फरवरी 2026। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, गोरखपुर के मुख्य सभागार में “आप कैसे सोचते हैं?” विषय पर सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम संस्थान की कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल डॉ. विभा दत्ता (सेवानिवृत्त) के नेतृत्व में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों को उनकी विशिष्ट चिंतन क्षमता का प्रभावी उपयोग करने के लिए प्रेरित करना तथा दैनिक कार्यों में दक्षता और उत्पादकता बढ़ाने के उपायों पर विचार-विमर्श करना था।


    कार्यक्रम में देश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने अपने विचार प्रस्तुत किए। वयोवृद्ध शल्य चिकित्सक वाइस एडमिरल डॉ. अनिल चंद्र आनंद, विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित, मानद प्राध्यापक, कलिंग आयुर्विज्ञान संस्थान, भुवनेश्वर ने “मस्तिष्क की जटिल कार्यप्रणाली” विषय पर व्याख्यान देते हुए बताया कि मानव मस्तिष्क की संरचना और कार्य प्रणाली को समझकर व्यक्ति अपनी सोच को सकारात्मक दिशा दे सकता है। उन्होंने कहा कि सुविचारित निर्णय, आत्मानुशासन और लक्ष्य के प्रति स्पष्टता जीवन में सफलता की आधारशिला हैं।


    जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. योगेश जैन ने अपने संवादात्मक सत्र में कहा कि उच्च गुणवत्ता वाली रोगी देखभाल सुनिश्चित करने में चिकित्सकों की सोचने की प्रक्रिया अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने बताया कि रोग की पहचान और उपचार संबंधी निर्णय लेते समय तार्किक, विश्लेषणात्मक और संतुलित चिंतन आवश्यक है। आधुनिक तकनीकी साधनों के बढ़ते प्रभाव के बीच विवेकपूर्ण और स्वतंत्र सोच बनाए रखना समय की मांग है।


    तीसरे वक्ता डॉ. सौरभ वर्शनेय, प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष (कर्ण-नाक-गला विभाग) तथा अधिष्ठाता (शैक्षणिक), अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, ऋषिकेश ने पारंपरिक सोच से हटकर रचनात्मक चिंतन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सरल किंतु नवीन विचार जटिल समस्याओं का समाधान खोजने में सहायक होते हैं और व्यक्तिगत तथा व्यावसायिक विकास को नई दिशा प्रदान करते हैं।


    कार्यक्रम के समापन अवसर पर कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता ने सभी वक्ताओं के विचारों की सराहना करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी आंतरिक चिंतन शक्ति को पहचानना चाहिए और उसका सकारात्मक एवं प्रभावी उपयोग करना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों और संकाय सदस्यों को निरंतर अध्ययन, आत्ममंथन और आत्मविकास के लिए प्रेरित किया।


    इस अवसर पर स्नातक चिकित्सा विद्यार्थी, परिचर्या विद्यार्थी, स्नातकोत्तर छात्र-छात्राएं तथा संकाय सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। प्रतिभागियों ने कार्यक्रम को ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक और विचारोत्तेजक बताया। धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

    No comments