ब्लॉक संसाधन केंद्र बांसगांव में आउट ऑफ स्कूल (शारदा) तीन दिवसीय प्रशिक्षण प्रारंभ
बांसगांव, गोरखपुर। ब्लॉक संसाधन केंद्र बांसगांव में तीन दिवसीय “आउट ऑफ स्कूल (शारदा)” प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ खंड शिक्षा अधिकारी रोहित पाण्डेय की अध्यक्षता में हुआ। प्रशिक्षण का उद्देश्य ऐसे बच्चों की पहचान, पुनः नामांकन और विद्यालय में उनके ठहराव को सुनिश्चित करना है, जो किसी कारणवश विद्यालय से बाहर हो गए हैं।
कार्यक्रम में संदर्भदाता के रूप में रामकृष्ण मिश्र एवं दिलीप श्रीवास्तव उपस्थित रहे। रामकृष्ण मिश्र ने विस्तार से बताया कि जो बच्चे लगातार 30 दिनों तक विद्यालय से अनुपस्थित रहते हैं या पढ़ाई से दूर हो जाते हैं, उन्हें पुनः मुख्यधारा में लाने के लिए शिक्षकों की सक्रिय भूमिका आवश्यक है। उन्होंने नामांकन की प्रक्रिया, अभिभावकों से संवाद और विद्यालय में अनुकूल वातावरण निर्माण पर विशेष जोर दिया।
दिलीप श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में कहा कि 6 से 14 वर्ष आयु वर्ग का कोई भी बालक या बालिका यदि प्रारंभिक विद्यालय में कभी नामांकित नहीं हुआ है, तो उसे विद्यालय से बाहर माना जाएगा। उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें अनिवार्य रूप से शिक्षा से जोड़ा जाए, ताकि सर्व शिक्षा के लक्ष्य को साकार किया जा सके।
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक संघ के ब्लॉक मंत्री संग्राम सिंह ने प्रशिक्षण को व्यवहारिक बनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान और अनुभव का प्रभावी अनुप्रयोग विद्यालय स्तर पर किया जाना चाहिए, तभी इसका वास्तविक लाभ बच्चों तक पहुंचेगा।
प्रशिक्षण में अंबरीश राय, अतुल प्रताप सिंह, अनिल पाण्डेय, श्रवण सिंह, अखंड प्रताप सिंह, नवीन त्रिपाठी, आशुतोष कुमार शुक्ला, अखिलेश त्रिपाठी, संदीप कुमार नायक, महेंद्र शर्मा, प्रकाश भानु प्रताप यादव, संजय कुमार राय, कुलदीप कुमार पाल, चंद्रनाथ राय, दीपक कुमार सिंह, राम प्रसाद, पंकज कुमार पांडे, चित्रसेन सिंह, नूर आलम, राज नारायण सिंह, तलत खातून, खुशबू सिंह, दीपा, वीरभद्र सिंह, तारा देवी, ममता मिश्रा, उर्मिला देवी, पूजा पांडे, रेखा, वंदना सिंह, प्रीति सिंह, साधना सिंह, अर्शी आजमी, सीमा राय, मंजुलता पाण्डेय सहित सैकड़ों शिक्षक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के संचालन और व्यवस्थापन में ब्लॉक संसाधन केंद्र बांसगांव के कार्यालय सहायक राजेश सिंह, मनोज यादव, चंद्रकेश सिंह और ईश्वर दयाल श्रीवास्तव ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षा के अधिकार को प्रभावी ढंग से लागू करने और प्रत्येक बच्चे को विद्यालय से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


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