सरयू तट पर 11 से 17 अक्टूबर तक होगा पितर तृप्ति महायज्ञ, बड़हलगंज बनेगा ‘छोटी काशी’
चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र के बड़हलगंज स्थित पवित्र सरयू तट पर आगामी 11 से 17 अक्टूबर तक आयोजित होने वाला पितर तृप्ति महायज्ञ क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह महायज्ञ न केवल सनातन परम्परा की महत्ता को स्थापित करेगा, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का भी कार्य करेगा। धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से इस आयोजन को क्षेत्र के लिए एक बड़ा आध्यात्मिक उत्सव माना जा रहा है।
शनिवार को बड़हलगंज स्थित मुक्तिपथ स्मृति हाल में आयोजित धर्मध्वज स्थापना समारोह के दौरान रंगमहल अयोध्या के पीठाधीश्वर महंत राम शरण दास महाराज ने इस महायज्ञ के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पितरों की तृप्ति और समाज के कल्याण की भावना से आयोजित यह महायज्ञ अत्यंत अप्रतिम और प्रेरणादायक होगा। उन्होंने महायज्ञ के संयोजक और चिल्लूपार के विधायक राजेश त्रिपाठी की सराहना करते हुए कहा कि सनातन संस्कृति को मजबूत करने और समाजहित में ऐसे भव्य आयोजन की परिकल्पना एक दूरदर्शी सामाजिक व्यक्ति ही कर सकता है।
समारोह के दौरान रंगमहल पीठाधीश्वर महंत राम शरण दास महाराज के नेतृत्व में मुख्य यजमान के रूप में नगर पंचायत बड़हलगंज की चेयरमैन प्रीति उमर, उनके पति और चेयरमैन प्रतिनिधि महेश उमर, विधायक राजेश त्रिपाठी तथा उनकी पत्नी सुमन त्रिपाठी ने विधिवत पूजा-अर्चना कर धर्मध्वज की पताका का आरोहण किया। इस दौरान 101 विद्वान ब्राह्मणों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार और शंखध्वनि के बीच पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया गया।
कार्यक्रम में उपस्थित आचार्य ब्रह्मानंद शास्त्री ने कहा कि प्राचीन काल में काशी के दशाश्वमेध घाट पर ब्रह्मा जी ने यज्ञ कर ब्रह्मांड के कल्याण की कामना की थी। वहीं पास में स्थित मणिकर्णिका घाट की आध्यात्मिक अनुभूति विश्व प्रसिद्ध है। उन्होंने कहा कि बड़हलगंज के सरयू तट पर होने वाला यह पितर तृप्ति महायज्ञ उसी दिव्य अनुभूति को पुनः जीवंत करने का कार्य करेगा।
सिद्ध पीठ मदरिया के महंत श्रीश दास ने कहा कि जिस प्रकार क्षेत्र का गोला नगर “छोटी अयोध्या” के नाम से जाना जाता है, उसी प्रकार इस महायज्ञ के बाद बड़हलगंज को लोग “छोटी काशी” के नाम से पहचानने लगेंगे। उन्होंने कहा कि इस आयोजन से क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान और अधिक मजबूत होगी।
मुख्य यज्ञाचार्य ब्रह्मानंद दूबे ने कहा कि अपने याज्ञिक जीवन में उन्होंने अनेक यज्ञों का संचालन किया है, लेकिन पितर तृप्ति महायज्ञ उनके लिए एक अद्भुत और अभिनव आयोजन होगा। उन्होंने बताया कि इस महायज्ञ में वैदिक विधि-विधान के साथ विशेष अनुष्ठान और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनसे श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक लाभ मिलेगा।
इस अवसर पर आचार्य जीतेन्द्र मिश्र, जीतेन्द्र दूबे, ललित भूषण मिश्र, आशीष द्विवेदी, दीपक त्रिपाठी, कन्हैयालाल त्रिपाठी, श्याम जी पाण्डेय, राम शिरोमणि शुक्ल, सत्यप्रकाश त्रिपाठी, सत्यप्रकाश पाण्डेय, राम नवल शुक्ल, राम प्रकाश, सहित अनेक विद्वान आचार्य और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
इसके अलावा भाजपा नेता उमेश यादव, उरुवा नगर पंचायत चेयरमैन प्रतिनिधि नवीन सिंह मुन्ना, जनसेवा संस्था के महामंत्री संतोष जायसवाल, भाजपा मंडल महामंत्री दीपक मिश्र, बृजेश वर्मा, गंगा सोनी, श्रीनिवास सोनी, गिरधारी लाल वर्मा, विनय तिवारी, विनोद कुमार जायसवाल, मुन्ना निषाद, ईओ राम समुख, लिपिक सुनील कुमार, बृजेश तिवारी, सहित बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता और क्षेत्रीय नागरिक भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
धार्मिक विद्वानों का मानना है कि सरयू तट पर आयोजित होने वाला यह पितर तृप्ति महायज्ञ क्षेत्र के आध्यात्मिक वातावरण को नई ऊर्जा देगा और श्रद्धालुओं को सनातन संस्कृति के महत्व से जोड़ने का कार्य करेगा।
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