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    गोरखपुर में “वर्ल्ड वेटरिनरी डे” उत्साह के साथ मनाया गया, पशु स्वास्थ्य जागरूकता पर दिया गया जोर

    उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जनपद में 25 अप्रैल 2026 को “वर्ल्ड वेटरिनरी डे” बड़े ही उत्साह और गरिमामय वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर पशु स्वास्थ्य और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के उद्देश्य से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का नेतृत्व वेद प्रकाश सिंह द्वारा किया गया, जिसमें जिले के पशु चिकित्सकों, कर्मचारियों और स्थानीय नागरिकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।


    कार्यक्रम का उद्देश्य और महत्व:

    “वर्ल्ड वेटरिनरी डे” मनाने का मुख्य उद्देश्य पशु स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और पशुपालकों को आधुनिक पशु चिकित्सा सेवाओं के बारे में जानकारी देना रहा। विशेषज्ञों ने इस दौरान बताया कि पशुधन न केवल किसानों की आय का महत्वपूर्ण स्रोत है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी है। स्वस्थ पशु ही एक समृद्ध किसान और मजबूत समाज की नींव रखते हैं।


    विशेषज्ञों की भागीदारी:

    कार्यक्रम में कई अनुभवी पशु चिकित्सकों ने हिस्सा लिया, जिनमें डॉ आशुतोष तिवारी, डॉ नवीन गुप्ता, डॉ सूर्यकांत सिंह और डॉ चंद्रकांत मौर्य प्रमुख रूप से शामिल रहे। इन विशेषज्ञों ने पशुपालकों को पशुओं के स्वास्थ्य, रोगों की पहचान, समय पर उपचार और पोषण से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी।


    जागरूकता सत्र और शिविर:

    इस अवसर पर विभिन्न जागरूकता सत्र, संगोष्ठियां और पशु चिकित्सा शिविर आयोजित किए गए। इन शिविरों में बड़ी संख्या में पशुपालकों ने अपने पशुओं की जांच कराई और आवश्यक परामर्श प्राप्त किया। विशेषज्ञों ने पशुओं के टीकाकरण, नियमित स्वास्थ्य जांच और संतुलित आहार के महत्व पर विशेष जोर दिया।


    पशुपालकों को यह भी बताया गया कि समय पर टीकाकरण और उचित देखभाल से कई गंभीर बीमारियों से बचाव संभव है। इसके अलावा आधुनिक तकनीकों और उपचार पद्धतियों के बारे में भी जानकारी दी गई, जिससे पशुपालक अपने पशुओं की बेहतर देखभाल कर सकें।


    वेद प्रकाश का संबोधन:

    कार्यक्रम का नेतृत्व कर रहे वेद प्रकाश ने अपने संबोधन में कहा कि इस तरह के आयोजन पशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि जागरूकता ही किसी भी समस्या का सबसे बड़ा समाधान है और ऐसे कार्यक्रमों से समाज में सकारात्मक बदलाव आता है।


    उन्होंने सभी पशुपालकों से अपील की कि वे नियमित रूप से अपने पशुओं की जांच कराएं और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएं। साथ ही उन्होंने संबंधित विभागों के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही इस तरह के कार्यक्रम सफल हो पाते हैं।


    स्थानीय सहभागिता और प्रभाव:

    कार्यक्रम में स्थानीय नागरिकों और पशुपालकों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। बड़ी संख्या में लोग अपने पशुओं के साथ पहुंचे और विशेषज्ञों से सलाह ली। इससे न केवल पशुपालकों को लाभ मिला, बल्कि क्षेत्र में पशु स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी बढ़ी।


    इस आयोजन से यह संदेश भी गया कि पशुओं की देखभाल केवल आर्थिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है।


    गोरखपुर में आयोजित “वर्ल्ड वेटरिनरी डे” कार्यक्रम ने पशु स्वास्थ्य और जागरूकता के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल पेश की है। इस तरह के आयोजन न केवल पशुपालकों को जागरूक करते हैं, बल्कि ग्रामीण विकास और आर्थिक मजबूती में भी अहम योगदान देते हैं। भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन जारी रहना चाहिए, ताकि पशुधन और किसानों दोनों का विकास सुनिश्चित किया जा सके।

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