अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान गोरखपुर में स्थापित होगी अत्याधुनिक त्रि-टेस्ला चुंबकीय अनुनाद चित्रण मशीन
गोरखपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान गोरखपुर में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक उन्नत एवं प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। संस्थान में अत्याधुनिक त्रि-टेस्ला चुंबकीय अनुनाद चित्रण मशीन स्थापित करने के लिए भारतीय तेल निगम लिमिटेड के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता 27 मई 2026 को संपन्न हुआ। इस पहल से पूर्वी उत्तर प्रदेश तथा आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को उच्च स्तरीय जांच सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
संस्थान परिसर में आयोजित कार्यक्रम में संस्थान की कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी मेजर जनरल डॉक्टर विभा दत्ता तथा भारतीय तेल निगम लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक (समन्वय एवं सामाजिक उत्तरदायित्व) विभूति रंजन प्रधान ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर संस्थान के वरिष्ठ चिकित्सक, प्राध्यापक तथा प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।
संस्थान में स्थापित होने वाली त्रि-टेस्ला चुंबकीय अनुनाद चित्रण मशीन आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की अत्यंत उन्नत तकनीक मानी जाती है। यह मशीन सामान्य जांच मशीनों की तुलना में अधिक स्पष्ट एवं उच्च गुणवत्ता वाले चित्र उपलब्ध कराती है। इसके माध्यम से रोगों का शीघ्र एवं सटीक पता लगाया जा सकेगा। विशेष रूप से मस्तिष्क, हृदय, कैंसर तथा हड्डी एवं मांसपेशियों से संबंधित रोगों की जांच में यह तकनीक अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।
विशेषज्ञों के अनुसार इस उन्नत मशीन में कार्यात्मक जांच की आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध रहेंगी, जिनकी सहायता से शरीर के आंतरिक अंगों की विस्तृत एवं सूक्ष्म जांच संभव हो सकेगी। इससे चिकित्सकों को रोग की स्थिति को बेहतर ढंग से समझने तथा उचित उपचार योजना तैयार करने में सहायता मिलेगी। इसके अतिरिक्त तीव्र गति से जांच पूरी होने के कारण मरीजों को अधिक समय तक मशीन के भीतर नहीं रहना पड़ेगा, जिससे जांच प्रक्रिया अधिक सहज एवं सुविधाजनक होगी।
पूर्वी उत्तर प्रदेश तथा आसपास के जिलों से प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान गोरखपुर पहुंचते हैं। आधुनिक जांच मशीन की स्थापना से उन्नत जांच सेवाओं की बढ़ती आवश्यकता को पूरा किया जा सकेगा। अब गंभीर बीमारियों की उच्च स्तरीय जांच के लिए मरीजों को महानगरों अथवा निजी चिकित्सालयों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इससे समय और धन दोनों की बचत होगी।
संस्थान प्रशासन का कहना है कि यह परियोजना केवल मरीजों के उपचार तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। नई सुविधा से चिकित्सा विद्यार्थियों, प्रशिक्षु चिकित्सकों तथा शोधकर्ताओं को आधुनिक तकनीक पर प्रशिक्षण प्राप्त होगा। इससे संस्थान में विभिन्न विभागों के बीच अनुसंधान सहयोग को भी बढ़ावा मिलेगा।
कार्यक्रम के दौरान चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर अजय भारती, रेडियो निदान विभाग के प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष डॉक्टर आनंद हटगांवकर, अधीक्षण अभियंता लेफ्टिनेंट कर्नल मनीषा तिवारी तथा जनसंपर्क अधिकारी डॉक्टर अरूप मोहंती सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। वहीं भारतीय तेल निगम लिमिटेड के प्रतिनिधियों ने भी इस पहल को सामाजिक दायित्व एवं जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान बताया।
कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों एवं विशेषज्ञों ने विश्वास व्यक्त किया कि यह परियोजना क्षेत्र में चिकित्सा जांच सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा तथा अनुसंधान को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता किसी भी बड़े चिकित्सालय की गुणवत्ता को और अधिक मजबूत बनाती है।
त्रि-टेस्ला चुंबकीय अनुनाद चित्रण मशीन की स्थापना से गोरखपुर के साथ-साथ बस्ती, देवरिया, महाराजगंज, कुशीनगर, सिद्धार्थनगर तथा बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों के मरीजों को भी अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ प्राप्त होगा। स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में यह पहल पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। इससे अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान गोरखपुर की पहचान एक आधुनिक एवं उन्नत चिकित्सा संस्थान के रूप में और अधिक मजबूत होगी।

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