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    गुरदासपुर की SDM अनुप्रीत कौर रंधावा गिरफ्तार, 1.63 करोड़ रुपये गबन मामले में कार्रवाई

    पंजाब से एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है। गुरदासपुर में तैनात एसडीएम अनुप्रीत कौर रंधावा को तरनतारन पुलिस ने 16 मई को कथित भ्रष्टाचार और सरकारी धन के गबन के मामले में गिरफ्तार कर लिया। मामला वर्ष 2018 में राजस्थान–जम्मू कश्मीर हाईवे परियोजना के लिए हुए भूमि अधिग्रहण से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि मुआवजे की रकम वितरण में भारी अनियमितताएं की गईं और ऐसे लोगों को भी भुगतान कराया गया जिनके नाम पर जमीन ही नहीं थी।


    पुलिस और जांच एजेंसियों के अनुसार, इस मामले में करीब 1.63 करोड़ रुपये के गबन का आरोप लगाया गया है। यह मामला कई वर्षों से जांच के दायरे में था और वर्ष 2019 में इस संबंध में एफआईआर दर्ज की गई थी। लंबे समय तक चली उच्चस्तरीय जांच के बाद अब प्रशासनिक अधिकारी की गिरफ्तारी होने से पूरे पंजाब प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई है।


    जमीन अधिग्रहण मुआवजे में अनियमितता का आरोप

    जानकारी के मुताबिक, राजस्थान–जम्मू कश्मीर हाईवे परियोजना के लिए कुछ क्षेत्रों में किसानों और जमीन मालिकों की भूमि अधिग्रहित की गई थी। इसके बदले सरकार द्वारा मुआवजा राशि जारी की गई थी। आरोप है कि उस समय मुआवजा वितरण प्रक्रिया में फर्जीवाड़ा किया गया और कुछ ऐसे लोगों के खातों में भी रकम ट्रांसफर की गई जिनका संबंधित जमीन से कोई अधिकार नहीं था।


    जांच एजेंसियों का कहना है कि सरकारी दस्तावेजों और रिकॉर्ड में हेरफेर कर करोड़ों रुपये की राशि गलत तरीके से जारी कराई गई। इसी मामले में एसडीएम अनुप्रीत कौर रंधावा का नाम सामने आया था। पुलिस ने पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद गिरफ्तारी की कार्रवाई की।


    2019 में दर्ज हुई थी एफआईआर

    सूत्रों के अनुसार, इस कथित घोटाले की शिकायत सामने आने के बाद वर्ष 2019 में एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बाद विजिलेंस और अन्य जांच एजेंसियों द्वारा मामले की विस्तृत जांच शुरू की गई। कई दस्तावेजों की जांच, बैंक खातों की पड़ताल और संबंधित अधिकारियों से पूछताछ की गई।

    करीब छह वर्षों तक चली जांच के बाद अब पुलिस ने कार्रवाई तेज करते हुए एसडीएम को गिरफ्तार कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है और आगे और भी खुलासे हो सकते हैं।


    पहली पोस्टिंग में ही विवादों में आईं अधिकारी

    बताया जा रहा है कि अनुप्रीत कौर रंधावा की यह पहली प्रमुख प्रशासनिक पोस्टिंग थी। लेकिन पहली ही पोस्टिंग के दौरान उन पर गंभीर आरोप लगने से प्रशासनिक सेवा की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं और लोग सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।


    प्रशासनिक तंत्र में मचा हड़कंप

    एसडीएम स्तर की अधिकारी की गिरफ्तारी के बाद पंजाब के प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। कई अधिकारी इस मामले को लेकर सतर्क हो गए हैं। वहीं आम लोगों का कहना है कि यदि सरकारी योजनाओं और भूमि अधिग्रहण जैसी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता नहीं होगी तो किसानों और वास्तविक लाभार्थियों को नुकसान उठाना पड़ेगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भूमि अधिग्रहण मामलों में पारदर्शी रिकॉर्ड, डिजिटल सत्यापन और समय-समय पर ऑडिट बेहद जरूरी है ताकि सरकारी धन का दुरुपयोग रोका जा सके।


    जांच जारी, कई और नाम आ सकते हैं सामने

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह जांच अभी पूरी नहीं हुई है। मामले में अन्य कर्मचारियों, बिचौलियों और संबंधित लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसियां बैंक ट्रांजैक्शन और दस्तावेजों का विश्लेषण कर रही हैं। आने वाले दिनों में इस केस में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

    फिलहाल पुलिस ने आरोपी अधिकारी को हिरासत में लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। पूरे मामले पर प्रशासन की नजर बनी हुई है।

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