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    करहल ग्राम सभा में सार्वजनिक रास्ते पर अतिक्रमण का आरोप, 20 से अधिक परिवारों का आवागमन प्रभावित; ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई गुहार

    बांसगांव (गोरखपुर)। बांसगांव तहसील क्षेत्र के अंतर्गत करहल ग्राम सभा में सार्वजनिक रास्ते को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव का एक पुराना सार्वजनिक मार्ग, जो वर्षों से लोगों के आवागमन का मुख्य साधन रहा है, वर्तमान समय में अतिक्रमण और जोताई के कारण लगभग समाप्त होने की स्थिति में पहुंच गया है। ग्रामीणों के अनुसार लगभग 10 कड़ी लंबे इस रास्ते पर कुछ लोगों द्वारा खेती कर दिए जाने से मार्ग का स्वरूप बिगड़ गया है और अब वहां केवल मेड़ जैसी स्थिति रह गई है। इस समस्या से करीब 20 से अधिक परिवार सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं।


    ग्रामीणों का कहना है कि यह रास्ता गांव के कई घरों को मुख्य मार्ग से जोड़ता है। वर्षों से लोग इसी रास्ते का उपयोग करते आ रहे हैं, लेकिन अब रास्ता बाधित होने के कारण उन्हें आने-जाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार कई बार ऐसी स्थिति बन जाती है कि बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को खेतों के किनारे या दूसरे लंबे रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है।


    बारिश के मौसम में बढ़ जाती है परेशानी

    ग्रामीणों ने बताया कि बारिश के दिनों में समस्या और गंभीर हो जाती है। रास्ता स्पष्ट न होने और जगह-जगह कीचड़ जमा होने के कारण लोगों का निकलना मुश्किल हो जाता है। कई बार फिसलन के कारण लोग गिरकर चोटिल भी हो चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते रास्ते का निस्तारण नहीं किया गया तो आने वाले मानसून में स्थिति और खराब हो सकती है।


    स्थानीय निवासी एवं पीड़ित पक्ष के ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि सार्वजनिक मार्ग के बाधित होने से गांव के अनेक परिवार प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण लंबे समय से प्रशासनिक अधिकारियों से समाधान की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई स्थायी कार्रवाई नहीं हो सकी है। उनका कहना है कि गांव के लोगों को मूलभूत सुविधाओं के तहत सुगम आवागमन का अधिकार मिलना चाहिए और सार्वजनिक रास्तों को अतिक्रमण से मुक्त कराया जाना चाहिए।


    कई बार की गई शिकायत, समाधान का इंतजार

    ग्रामीणों के अनुसार इस मामले को लेकर कई बार तहसील प्रशासन और संबंधित राजस्व अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। लोगों का कहना है कि उन्होंने लिखित एवं मौखिक रूप से शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन समस्या का समाधान अभी तक नहीं हो पाया है। इससे ग्रामीणों में निराशा और असंतोष बढ़ रहा है।

    गांव के लोगों का कहना है कि सार्वजनिक रास्ता केवल एक मार्ग नहीं बल्कि उनके दैनिक जीवन की आवश्यकता है। खेतों, विद्यालय, बाजार और अन्य आवश्यक स्थानों तक पहुंचने के लिए इसी रास्ते का उपयोग किया जाता रहा है। ऐसे में रास्ता बाधित होने से ग्रामीण जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।


    ग्रामीणों ने किया विरोध, उठाई समाधान की मांग

    समस्या के समाधान में हो रही देरी से नाराज ग्रामीणों ने एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन किया और प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष का विरोध करना नहीं है, बल्कि सार्वजनिक हित से जुड़े रास्ते को बहाल कराना है ताकि सभी ग्रामीणों को आवागमन की सुविधा मिल सके।

    ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि राजस्व अभिलेखों के आधार पर रास्ते की पैमाइश कराकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए और यदि कहीं अतिक्रमण पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि इससे विवाद का स्थायी समाधान निकल सकेगा।


    ग्राम प्रधान ने दिया समाधान का आश्वासन

    मामले को लेकर ग्राम प्रधान ज्ञान प्रसाद मौर्य ने बताया कि उन्हें ग्रामीणों की समस्या की जानकारी है। उन्होंने कहा कि यह सार्वजनिक हित से जुड़ा विषय है और इसके समाधान के लिए प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत की जा रही है। ग्राम प्रधान ने भरोसा दिलाया कि प्रशासन के सहयोग से जल्द ही रास्ते के निस्तारण का प्रयास किया जाएगा ताकि प्रभावित परिवारों को राहत मिल सके।

    उन्होंने कहा कि गांव के विकास और लोगों की सुविधा उनकी प्राथमिकता है तथा किसी भी वैध सार्वजनिक मार्ग को बाधित नहीं रहने दिया जाना चाहिए। इसके लिए आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई कराई जाएगी।


    राजस्व विभाग ने जांच का दिया भरोसा

    वहीं, राजस्व विभाग के कानूनगो आशीष शाही ने बताया कि मामले की जानकारी प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि लेखपाल के साथ मौके पर जाकर रास्ते की पैमाइश कराई जाएगी। राजस्व अभिलेखों और मौके की स्थिति का मिलान करने के बाद जो तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

    उन्होंने कहा कि प्रशासन का प्रयास रहेगा कि विवाद का समाधान निष्पक्ष और नियमों के अनुरूप किया जाए, जिससे किसी भी पक्ष के साथ अन्याय न हो और ग्रामीणों को आवश्यक सुविधा मिल सके।


    ग्रामीणों की मांग

    ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और तहसील प्रशासन से मांग की है कि सार्वजनिक रास्ते की जल्द से जल्द पैमाइश कराकर स्थिति स्पष्ट की जाए तथा आवागमन में आ रही बाधाओं को दूर किया जाए। उनका कहना है कि यदि समय पर उचित कार्रवाई होती है तो गांव के दर्जनों परिवारों को राहत मिलेगी और लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान संभव हो सकेगा।

    फिलहाल ग्रामीण प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं और उम्मीद जता रहे हैं कि संबंधित विभाग जल्द ही मामले का निस्तारण कर सार्वजनिक मार्ग को सुचारु रूप से बहाल करेगा।

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