प्रदर्शन से जुड़े मुकदमे वापस न लेने की मांग: अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने राष्ट्रपति, गृह मंत्री, उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री को भेजा प्रार्थना-पत्र
वाराणसी। प्रदर्शन और उससे जुड़े मामलों में दर्ज मुकदमों को जांच पूरी होने से पहले वापस न लेने की मांग को लेकर वाराणसी के वरिष्ठ अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने देश के प्रमुख संवैधानिक और प्रशासनिक अधिकारियों को विस्तृत प्रार्थना-पत्र भेजा है। इस संबंध में दिल्ली के मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा उनके आवेदन को संबंधित विभाग के मंत्री आशीष सूद के कार्यालय को आवश्यक परीक्षण और आगे की कार्रवाई के लिए अग्रेषित किए जाने की जानकारी भी दी गई है।
अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी, जो दी बनारस बार एसोसिएशन, वाराणसी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष तथा भारतीय जनता पार्टी, विधि प्रकोष्ठ–काशी क्षेत्र के संयोजक हैं, ने 27 जुलाई 2026 को सुबह 8:34 बजे राष्ट्रपति, केंद्रीय गृह मंत्री, दिल्ली के उपराज्यपाल, दिल्ली के मुख्यमंत्री, दिल्ली पुलिस आयुक्त सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को विस्तृत प्रार्थना-पत्र भेजा। पत्र में उन्होंने प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच पूरी होने से पहले किसी भी आपराधिक मुकदमे को वापस न लेने का अनुरोध किया है।
स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की उठाई मांग
प्रार्थना-पत्र में अधिवक्ता त्रिपाठी ने पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जांच में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के लिए कौन जिम्मेदार था, किन लोगों ने वित्तीय सहयोग दिया, आयोजन में किसकी भूमिका रही, भड़काऊ भाषण किसने दिए तथा कानून-व्यवस्था प्रभावित करने में किन व्यक्तियों या संगठनों की भूमिका रही।
उन्होंने मांग की कि जांच पूरी होने से पहले मुकदमे वापस लेने का कोई भी निर्णय न्यायिक प्रक्रिया और कानून के शासन की भावना के अनुरूप नहीं होगा। इसलिए पहले तथ्यों की पूरी जांच होनी चाहिए और उसके बाद ही किसी प्रकार का निर्णय लिया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने भेजा जवाब
प्रार्थना-पत्र भेजे जाने के कुछ घंटे बाद ही दिल्ली के मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से आधिकारिक ईमेल के माध्यम से जवाब दिया गया। मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया कि यह विषय संबंधित विभाग के अधिकार क्षेत्र में आता है। इसलिए आवेदन को दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद के कार्यालय को आवश्यक परीक्षण (Perusal) एवं आगे की आवश्यक कार्रवाई (Further Necessary Action) के लिए अग्रेषित कर दिया गया है। इस कार्रवाई की प्रति प्रेषक को भी उपलब्ध कराई गई।
पहले भी दी थी चेतावनी
अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने अपने प्रार्थना-पत्र में यह भी उल्लेख किया कि आंदोलन के प्रारंभिक चरण में उन्होंने कई संवैधानिक और प्रशासनिक अधिकारियों को शिकायतें एवं प्रार्थना-पत्र भेजकर संभावित कानून-व्यवस्था संबंधी स्थिति के प्रति आगाह किया था।
उनका कहना है कि यदि उस समय प्रभावी कार्रवाई की जाती तो बाद में उत्पन्न हुई गंभीर परिस्थितियों से बचा जा सकता था। उन्होंने दावा किया कि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए जाने के कारण स्थिति अधिक गंभीर हो गई।
दोषियों पर हो सख्त कार्रवाई
प्रार्थना-पत्र में यह भी मांग की गई है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच के बाद यदि किसी व्यक्ति, संगठन या अन्य पक्ष की भूमिका सामने आती है तो उसके विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि हिंसा, वित्तीय सहयोग, भड़काऊ भाषण और कानून-व्यवस्था भंग करने के मामलों में जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
कानून के शासन पर दिया जोर
अधिवक्ता त्रिपाठी ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध-प्रदर्शन का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन यदि किसी प्रदर्शन के दौरान हिंसा या कानून-व्यवस्था भंग होने के आरोप सामने आते हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने आग्रह किया कि किसी भी मामले में जांच पूरी होने से पहले मुकदमे वापस लेने का निर्णय न लिया जाए, ताकि न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता बनी रहे और सभी तथ्यों की पारदर्शी तरीके से जांच हो सके।
प्रशासनिक कार्रवाई पर नजर
अब इस मामले में दिल्ली सरकार के संबंधित विभाग द्वारा प्रार्थना-पत्र का परीक्षण किए जाने के बाद आगे क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर सभी की नजर रहेगी। फिलहाल अधिवक्ता द्वारा भेजे गए प्रार्थना-पत्र को संबंधित मंत्री के कार्यालय में विचारार्थ भेज दिया गया है। आगे की कार्रवाई संबंधित विभाग की जांच और प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुसार होगी।

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