मुंडन की खुशियां मातम में बदलीं: बाल्टी में डूबने से 8 माह की मासूम आनवि की मौत
गोरखपुर/बांसगांव। जिस घर में कुछ ही दिनों बाद किलकारियों के बीच मुंडन संस्कार का उत्सव मनाया जाना था, उसी घर में अब चीख-पुकार और मातम पसरा हुआ है। आठ माह की मासूम आनवि की एक दर्दनाक हादसे में मौत हो गई। यह घटना 3 अगस्त 2026 को दोपहर करीब 12 बजे की है। मासूम की मौत से न केवल परिवार बल्कि पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है।
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| मृत बची आनवी |
जानकारी के अनुसार, आनवि के पिता पटना में पेंट-पॉलिश का काम करते हैं, जबकि उसकी मां घर पर रहती हैं। परिवार ने 8 अगस्त को बच्ची के मुंडन संस्कार और भोज का कार्यक्रम तय किया था। रिश्तेदारों को निमंत्रण दिया जा चुका था और घर में तैयारियां भी चल रही थीं। किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि खुशियों का यह माहौल कुछ ही पलों में गहरे मातम में बदल जाएगा।
बताया जा रहा है कि घटना वाले दिन मासूम आनवि घर में खेल रही थी। खेलते-खेलते वह बाथरूम के पास पहुंच गई, जहां पानी से भरी एक बाल्टी रखी थी। इसी दौरान उसके हाथ से साबुन बाल्टी में गिर गया। मासूम उसे निकालने के लिए बाल्टी की ओर झुकी, लेकिन संतुलन बिगड़ने से वह बाल्टी में गिर गई। इतने छोटे बच्चे अपने बल पर बाहर नहीं निकल पाते, जिसके कारण यह हादसा हो गया।
कुछ देर बाद जब परिजनों की नजर बच्ची पर पड़ी तो घर में अफरा-तफरी मच गई। आनन-फानन में परिजन उसे लेकर बांसगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। वहां मौजूद चिकित्सकों ने जांच के बाद मासूम को मृत घोषित कर दिया। यह खबर सुनते ही परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। मां बेसुध होकर रोने लगीं, जबकि पिता को पटना में घटना की सूचना दी गई, जिसके बाद वे तुरंत घर के लिए रवाना हो गए।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बांसगांव के अधीक्षक डॉ. के. एम. अग्रवाल ने बताया कि अस्पताल पहुंचने तक बच्ची की मौत हो चुकी थी। उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों को कभी भी बिना निगरानी के नहीं छोड़ना चाहिए। घर में रखी पानी की बाल्टी, टब, ड्रम या अन्य पानी से भरे बर्तनों से भी छोटे बच्चों की जान को गंभीर खतरा हो सकता है। अभिभावकों को हर समय विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए, क्योंकि कुछ इंच पानी भी शिशुओं के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
डॉ. अग्रवाल ने यह भी सलाह दी कि घर में यदि छोटे बच्चे हों तो पानी से भरी बाल्टियों को ढककर रखें या पूरी तरह खाली कर दें। बाथरूम का दरवाजा बंद रखें और बच्चों को कभी भी अकेले खेलने के लिए न छोड़ें। थोड़ी-सी लापरवाही भी पूरे परिवार को जीवनभर का दर्द दे सकती है।
इस हृदयविदारक घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है। जिस घर में मुंडन समारोह की तैयारियां चल रही थीं, वहां अब रिश्तेदार और ग्रामीण सांत्वना देने पहुंच रहे हैं। हर किसी की आंखें नम हैं और लोग इस दर्दनाक हादसे को सुनकर स्तब्ध हैं।
बाल सुरक्षा विशेषज्ञों का भी कहना है कि छह महीने से एक वर्ष तक के बच्चे तेजी से रेंगना और आसपास की चीजों को पकड़ना सीख जाते हैं। इस उम्र में वे हर वस्तु को छूने और पकड़ने की कोशिश करते हैं। ऐसे में घर के बाथरूम, रसोई और पानी से भरे बर्तनों के आसपास विशेष सावधानी बरतना बेहद जरूरी होता है।
यह हादसा सभी अभिभावकों के लिए एक गंभीर चेतावनी भी है कि छोटे बच्चों की सुरक्षा में जरा-सी चूक भी अपूरणीय क्षति का कारण बन सकती है। बच्चों पर हर समय निगरानी रखना, घर को सुरक्षित बनाना और संभावित खतरों को पहले से दूर करना ही ऐसी घटनाओं को रोकने का सबसे प्रभावी उपाय है।
फिलहाल, आनवि की असमय मौत से पूरा परिवार गहरे सदमे में है। 8 अगस्त को होने वाला मुंडन संस्कार अब कभी नहीं होगा। जिस मासूम की किलकारियों से घर गूंजता था, उसकी यादें ही अब परिवार के पास बची हैं। यह दर्दनाक हादसा हमेशा सभी को यह याद दिलाता रहेगा कि छोटे बच्चों की सुरक्षा में बरती गई सावधानी ही उनके जीवन की सबसे बड़ी सुरक्षा है।

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