AIIMS गोरखपुर में राष्ट्रीय स्तर की PRATIBIMB कार्यशाला का सफल समापन, 16 राज्यों के 50 शोधकर्ताओं ने लिया प्रशिक्षण
गोरखपुर, 29 अगस्त 2026। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) गोरखपुर में स्वास्थ्य डेटा के विश्लेषण और शोध के प्रभावी उपयोग को लेकर आयोजित राष्ट्रीय स्तर की PRATIBIMB उन्नत कार्यशाला-2026 का शनिवार को सफलतापूर्वक समापन हुआ। 24 से 29 अगस्त तक आयोजित छह दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में देश के 16 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से चयनित 50 शोधकर्ताओं एवं स्वास्थ्य पेशेवरों ने भाग लिया। प्रतिभागियों को स्वास्थ्य शोध, सांख्यिकीय विश्लेषण, डेटा प्रबंधन, शोध-पत्र लेखन और वैज्ञानिक प्रस्तुति से संबंधित उन्नत प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यशाला का उद्देश्य स्वास्थ्य एवं पर्यावरण से जुड़े आंकड़ों का वैज्ञानिक तरीके से विश्लेषण करने, शोध क्षमता को मजबूत करने और शोध से प्राप्त साक्ष्यों को स्वास्थ्य सेवाओं, कार्यक्रमों तथा नीतिगत निर्णयों में प्रभावी रूप से उपयोग करने की क्षमता विकसित करना रहा।
PRATIBIMB के तहत हुआ शोध क्षमता निर्माण
PRATIBIMB का पूरा नाम Policy Research & Analytics Training Initiative for Bridging Health & Environment Models in Bharat है। यह केवल पारंपरिक व्याख्यान आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं है, बल्कि इसे तीन महीने की एक संरचित शोध-विकास प्रक्रिया के रूप में विकसित किया गया है।
इस पहल के लिए देशभर से कुल 230 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से 100 प्रतिभागियों का चयन मई 2026 से शुरू हुए ऑनलाइन प्रशिक्षण चरण के लिए किया गया। ऑनलाइन चरण में प्रतिभागियों को शोध प्रश्न तैयार करने, परिकल्पना विकसित करने, शोध पद्धति तय करने, डेटा विश्लेषण, डेटा दृश्यांकन और वैज्ञानिक शोध-पत्र तैयार करने की जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को अपने-अपने शोध प्रस्तावों और शोध-पत्रों पर काम करने का अवसर भी मिला। ऑनलाइन चरण पूरा होने के बाद 64 प्रतिभागियों ने पूर्ण शोध-पत्र का प्रारूप तैयार कर प्रस्तुत किया। इन शोध-पत्रों के मूल्यांकन के बाद उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 50 से अधिक प्रतिभागियों का चयन AIIMS गोरखपुर में आयोजित उन्नत आवासीय प्रशिक्षण के लिए किया गया।
16 राज्यों से पहुंचे शोधकर्ता
AIIMS गोरखपुर में आयोजित छह दिवसीय कार्यशाला में देश के विभिन्न हिस्सों से आए शोधकर्ताओं और स्वास्थ्य पेशेवरों ने भाग लिया। प्रतिभागियों की शैक्षणिक एवं व्यावसायिक पृष्ठभूमि भी अलग-अलग रही। कार्यक्रम में 51 प्रतिशत महिला प्रतिभागियों की भागीदारी रही।
विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिभागियों को एक साथ प्रशिक्षण मिलने से शोध अनुभवों के आदान-प्रदान और अंतर-विषयक सहयोग के नए अवसर भी विकसित हुए। कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों ने स्वास्थ्य डेटा से जुड़े वास्तविक शोध प्रश्नों पर चर्चा की और विशेषज्ञों से उनके समाधान के लिए मार्गदर्शन प्राप्त किया।
डेटा विश्लेषण और सांख्यिकीय तकनीकों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण
छह दिवसीय उन्नत कार्यशाला में केवल सैद्धांतिक जानकारी देने के बजाय व्यावहारिक प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया गया। प्रतिभागियों को सांख्यिकीय सॉफ्टवेयर, डेटा प्रबंधन, महामारी विज्ञान, सांख्यिकीय विश्लेषण और परिकल्पना परीक्षण की विभिन्न तकनीकों का अभ्यास कराया गया।
इसके साथ ही शोध परिणामों की वैज्ञानिक व्याख्या, डेटा के दृश्यांकन और शोध निष्कर्षों को प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की जानकारी भी दी गई।
कार्यशाला में राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध महत्वपूर्ण डेटासेट के उपयोग पर भी विशेष सत्र आयोजित किए गए। इनमें राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS), भारत की जनगणना, राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (NSS/NSSO) और इंडियन ह्यूमन डेवलपमेंट सर्वे (IHDS) जैसे प्रमुख डेटासेट शामिल रहे।
इन डेटासेट के माध्यम से प्रतिभागियों को वास्तविक स्वास्थ्य एवं सामाजिक आंकड़ों का विश्लेषण करने और उनसे उपयोगी शोध निष्कर्ष निकालने का व्यावहारिक अनुभव मिला।
GIS और स्थानिक महामारी विज्ञान पर भी प्रशिक्षण
PRATIBIMB कार्यशाला में स्वास्थ्य डेटा के साथ भौगोलिक एवं पर्यावरणीय सूचनाओं के उपयोग को भी प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया। प्रतिभागियों को बहु-चर एवं बहु-स्तरीय विश्लेषण, भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS), स्थानिक महामारी विज्ञान, जलवायु एवं स्वास्थ्य अनुसंधान तथा साक्ष्य-आधारित जैव-सांख्यिकी से जुड़े विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यशाला के दौरान IHDS डेटा के शोध अनुप्रयोगों, NFHS के जिला-स्तरीय पहचानकर्ताओं के साथ जलवायु डेटा के एकीकरण और स्थानिक विश्लेषण से संबंधित व्यावहारिक सत्र आयोजित किए गए।
इस प्रशिक्षण का उद्देश्य शोधकर्ताओं को यह समझाना था कि विभिन्न स्रोतों से प्राप्त आंकड़ों को वैज्ञानिक तरीके से जोड़कर स्वास्थ्य से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर कैसे तलाशे जा सकते हैं।
शोधकर्ताओं ने विशेषज्ञों के सामने प्रस्तुत किया अपना शोध
कार्यशाला का एक महत्वपूर्ण हिस्सा प्रतिभागियों द्वारा अपने स्वयं के शोध कार्यों की वैज्ञानिक प्रस्तुति रहा। 28 अगस्त को शोध प्रस्तुति सत्र-I और II, जबकि 29 अगस्त को सत्र-III आयोजित किया गया।
इन सत्रों में प्रतिभागियों ने विशेषज्ञ वैज्ञानिक पैनल के सामने अपने शोध कार्य प्रस्तुत किए। प्रस्तुति के दौरान शोध पद्धति, डेटा विश्लेषण और निष्कर्षों से संबंधित सवालों पर चर्चा हुई।
विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को उनके शोध कार्य को और मजबूत बनाने के लिए आवश्यक सुझाव दिए। इससे प्रतिभागियों को अपने शोध-पत्र में सुधार करने और वैज्ञानिक गुणवत्ता बढ़ाने का अवसर मिला।
शोध-पत्र लेखन और प्रकाशन रणनीति पर भी मार्गदर्शन
PRATIBIMB कार्यक्रम में शोध करने के साथ-साथ उसे वैज्ञानिक रूप से प्रस्तुत करने और प्रकाशित करने की प्रक्रिया पर भी ध्यान दिया गया। प्रतिभागियों को शोध-पत्र लेखन, विश्लेषणात्मक पद्धतियों, शोध निष्कर्षों की व्याख्या और उपयुक्त शोध-पत्रिका के चयन से संबंधित व्यक्तिगत मार्गदर्शन दिया गया।
विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को यह समझने में सहायता की कि किसी शोध को प्रकाशन योग्य बनाने के लिए वैज्ञानिक पद्धति, डेटा की गुणवत्ता, विश्लेषण और निष्कर्षों की प्रस्तुति किस प्रकार महत्वपूर्ण होती है।
कार्यशाला का उद्देश्य प्रतिभागियों के मौजूदा शोध कार्यों को अधिक व्यवस्थित, वैज्ञानिक और संभावित रूप से प्रकाशन योग्य स्वरूप प्रदान करना भी रहा।
पोस्टर प्रस्तुतियों और पुरस्कारों के साथ हुआ समापन
कार्यशाला के अंतिम दिन प्रतिभागियों की पोस्टर प्रस्तुतियों का आयोजन किया गया। प्रस्तुत पोस्टरों का विशेषज्ञों द्वारा मूल्यांकन किया गया। इसके बाद सर्वश्रेष्ठ शोध-पत्र और सर्वश्रेष्ठ पोस्टर पुरस्कार प्रदान किए गए।
समापन समारोह में प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम से जुड़े अपने अनुभव और प्रतिक्रिया साझा की। इसके बाद प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए और सामूहिक छायाचित्र के साथ कार्यक्रम का औपचारिक समापन हुआ।
AIIMS गोरखपुर नेतृत्व ने दी बधाई
कार्यक्रम का आयोजन मेजर जनरल (डॉ.) विभा दत्ता, एसएम (सेवानिवृत्त), कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, AIIMS गोरखपुर के संरक्षण में किया गया। प्रो. (डॉ.) महिमा मित्तल, डीन (अकादमिक) तथा प्रो. (डॉ.) आनंद मोहन दीक्षित, डीन (अनुसंधान) एवं विभागाध्यक्ष, सामुदायिक एवं पारिवारिक चिकित्सा विभाग सह-संरक्षक रहे।
कार्यक्रम का समन्वय AIIMS गोरखपुर के सामुदायिक एवं पारिवारिक चिकित्सा विभाग के सहायक प्रोफेसर एवं PRATIBIMB के आयोजन सचिव डॉ. यू. वेंकटेश के नेतृत्व में आयोजन समिति द्वारा किया गया।
समापन अवसर पर मेजर जनरल (डॉ.) विभा दत्ता ने सभी प्रतिभागियों और आयोजन टीम को बधाई दी। उन्होंने शोध क्षमता को मजबूत करने तथा वैज्ञानिक साक्ष्यों को स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रभावी कार्रवाई से जोड़ने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान, तकनीकी कौशल और विशेषज्ञ मार्गदर्शन का उपयोग अपने शोध कार्य को आगे बढ़ाने में करने का आह्वान किया।
राष्ट्रीय विशेषज्ञों की रही सहभागिता
PRATIBIMB कार्यशाला में देश और विदेश से जुड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं शोध क्षेत्र के विशेषज्ञों ने भी सहभागिता की। इनमें डॉ. आशू ग्रोवर, वैज्ञानिक ‘G’ एवं प्रमुख, डिवीजन ऑफ डिलीवरी रिसर्च (इम्प्लीमेंटेशन रिसर्च), ICMR मुख्यालय, नई दिल्ली; डॉ. ओम प्रकाश बेरा, क्षेत्रीय सलाहकार–एशिया, ग्लोबल हेल्थ एडवोकेसी इनक्यूबेटर, USA; तथा प्रो. डॉ. जुगल किशोर, निदेशक प्रोफेसर एवं पूर्व विभागाध्यक्ष, सामुदायिक चिकित्सा विभाग, VMMC एवं सफदरजंग अस्पताल, नई दिल्ली प्रमुख रहे।
इसके अलावा देश के विभिन्न प्रतिष्ठित शैक्षणिक और शोध संस्थानों के संकाय सदस्यों एवं विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण सत्रों में अपना योगदान दिया।
आवासीय प्रशिक्षण के बाद भी जारी रहेगी शोध प्रक्रिया
PRATIBIMB की शोध-विकास प्रक्रिया छह दिवसीय आवासीय कार्यशाला के साथ समाप्त नहीं होगी। प्रतिभागियों से अपेक्षा की गई है कि वे कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों से मिले सुझावों को अपने शोध-पत्रों में शामिल करते हुए अपने अध्ययन को और अधिक परिष्कृत करेंगे।
कार्यक्रम का दीर्घकालिक उद्देश्य उच्च गुणवत्ता वाले शोध को बढ़ावा देना और शोधकर्ताओं के ऐसे राष्ट्रीय समुदाय का निर्माण करना है, जो स्वास्थ्य एवं पर्यावरण से जुड़े डेटा का वैज्ञानिक एवं प्रभावी उपयोग कर सके।
स्वास्थ्य नीति और सेवाओं में शोध को उपयोगी बनाने का लक्ष्य
PRATIBIMB पहल का व्यापक उद्देश्य केवल शोध-पत्र तैयार करना नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक शोध को साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य नीति, स्वास्थ्य कार्यक्रमों और स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना है। सही तरीके से विश्लेषित स्वास्थ्य डेटा के माध्यम से स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को समझने, प्राथमिकताएं तय करने और प्रभावी निर्णय लेने में सहायता मिल सकती है।
AIIMS गोरखपुर में आयोजित इस राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला ने देशभर के शोधकर्ताओं को एक साझा मंच प्रदान किया, जहां उन्होंने डेटा विश्लेषण, शोध पद्धति, वैज्ञानिक लेखन और शोध प्रस्तुति से जुड़े कौशल को मजबूत किया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में AIIMS गोरखपुर के सामुदायिक एवं पारिवारिक चिकित्सा विभाग, आयोजन समिति, विशेषज्ञों, मार्गदर्शकों, वैज्ञानिक अध्यक्षों और प्रतिभागियों के सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रही। PRATIBIMB 2026 का यह प्रशिक्षण स्वास्थ्य शोध के क्षेत्र में क्षमता निर्माण और साक्ष्य-आधारित निर्णय प्रक्रिया को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया।


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