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    गंगा-वरुणा में उफान, निचले इलाकों में घुसा बाढ़ का पानी; राहत शिविरों में लौटने लगे परिवार

    वाराणसी। गंगा नदी के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि से वाराणसी में बाढ़ का असर अब तेजी से दिखाई देने लगा है। गंगा के बढ़ते जलस्तर के साथ ही वरुणा नदी भी उफान पर है। तटवर्ती और निचले इलाकों में बाढ़ का पानी आबादी के बीच पहुंचने लगा है। इसके साथ ही खेतों में खड़ी फसल और सब्जियों के डूबने से स्थानीय लोगों की परेशानी बढ़ गई है। प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।


    रविवार को वरुणा नदी के बाढ़ क्षेत्र से प्रभावित करीब दो दर्जन परिवार दोबारा राहत शिविरों में पहुंच गए। जलस्तर बढ़ने के कारण इन परिवारों को अपने घरों से बाहर निकलकर सुरक्षित स्थान की ओर जाना पड़ा। बाढ़ के पानी के आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंचने से लोगों को दैनिक जरूरतों और आवागमन को लेकर भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।


    गंगा का जलस्तर इस साल के उच्चतम स्तर पर

    केंद्रीय जल आयोग और आपदा विभाग की ओर से जारी जानकारी के अनुसार गंगा के जलस्तर में अगले 24 घंटे तक वृद्धि जारी रहने की संभावना है। हालांकि जलस्तर बढ़ने की रफ्तार में कुछ कमी आने की उम्मीद जताई गई है। रविवार सुबह आठ बजे गंगा का जलस्तर 69.94 मीटर दर्ज किया गया, जो इस वर्ष अब तक का सबसे ऊंचा स्तर बताया गया है।

    लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण गंगा के किनारे स्थित घाटों और आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। प्रशासन की ओर से संवेदनशील इलाकों की निगरानी की जा रही है। नदी के जलस्तर में आगे होने वाली वृद्धि को देखते हुए तटवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।


    अस्सी घाट पर डूबा सुबह-ए-बनारस का मंच

    गंगा में तेज उफान का असर वाराणसी के प्रमुख घाटों पर भी दिखाई दे रहा है। अस्सी घाट पर सुबह-ए-बनारस का मंच एक बार फिर बाढ़ के पानी में डूब गया। जलस्तर बढ़ने के कारण घाट पर होने वाली गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। गंगा आरती के आयोजन स्थल में भी बदलाव करना पड़ा है।

    घाट किनारे कारोबार करने वाले दुकानदारों की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। पानी बढ़ने के कारण कई दुकानें सड़क की ओर आ गई हैं। पुराने अस्सी घाट की तरफ जाने वाले मार्ग पर भी बाढ़ का पानी सड़क की ओर बढ़ने लगा है। इससे स्थानीय लोगों और पर्यटकों के आवागमन पर असर पड़ रहा है।

    वाराणसी के घाटों पर गंगा का जलस्तर बढ़ना शहर के लिए केवल धार्मिक और पर्यटन गतिविधियों को प्रभावित करने वाला विषय नहीं है, बल्कि इससे तटवर्ती बस्तियों में रहने वाले लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी भी प्रभावित होती है। जलस्तर बढ़ने के साथ प्रशासन को राहत और सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ानी पड़ रही है।


    हरिश्चंद्र घाट पर सड़क पर हो रहा शवदाह

    गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर अंतिम संस्कार की व्यवस्था पर भी पड़ा है। हरिश्चंद्र घाट पर बाढ़ का पानी बढ़ने के कारण सड़क पर शवदाह किए जाने की स्थिति सामने आई है। वहीं मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार के लिए पहुंचने वाले लोगों को लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ रही है।

    घाटों पर पानी बढ़ने के कारण सामान्य व्यवस्था प्रभावित हुई है। इससे अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन और संबंधित विभागों के सामने अब घाटों पर सुरक्षित व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती भी बढ़ गई है।


    दशाश्वमेध से नमोघाट तक बढ़ी निगरानी

    बाढ़ की स्थिति को देखते हुए दशाश्वमेध घाट से नमोघाट के बीच एनडीआरएफ और पुलिस की सक्रियता बढ़ा दी गई है। संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा सके।

    दशाश्वमेध घाट स्थित जल पुलिस चौकी को भी बढ़ते जलस्तर को देखते हुए मीरघाट के पास स्थानांतरित कर दिया गया है। नदी के आसपास पुलिस और राहत दलों की गतिविधियां बढ़ने से प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।


    वरुणा के आसपास भी बढ़ी चिंता

    गंगा के बढ़ते जलस्तर का सीधा प्रभाव वरुणा नदी पर भी पड़ रहा है। वरुणा के बाढ़ क्षेत्र में पानी बढ़ने के कारण निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ रहा है। रविवार को करीब दो दर्जन परिवारों का राहत शिविर में दोबारा पहुंचना इसी बढ़ते खतरे का संकेत है।

    वरुणा के आसपास के इलाकों में खेतों और सब्जियों में पानी भरने से किसानों की चिंता भी बढ़ गई है। लगातार जलभराव रहने पर फसलों को नुकसान होने की आशंका है। ग्रामीण और तटवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोग जलस्तर में होने वाले बदलाव पर नजर बनाए हुए हैं।


    प्रशासन की नजर जलस्तर और संवेदनशील इलाकों पर

    गंगा और वरुणा में बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन की प्राथमिकता निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा बनी हुई है। राहत शिविरों में पहुंचने वाले परिवारों की आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी की जा रही है।

    आपदा विभाग और स्थानीय प्रशासन की ओर से लोगों को नदी और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से जाने से बचने की सलाह दी जा रही है। जलस्तर में और वृद्धि होने की स्थिति में प्रभावित आबादी को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए तैयारियां बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है।

    फिलहाल गंगा का जलस्तर 69.94 मीटर तक पहुंच चुका है और अगले 24 घंटे में इसमें वृद्धि की संभावना जताई गई है। ऐसे में वाराणसी के तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ी हुई है। आने वाले घंटों में जलस्तर की स्थिति और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पानी के फैलाव पर सभी की नजर रहेगी।

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