सीमा सुरक्षा में हमारी भूमिका पर जन-जागरूकता कार्यक्रम, महिला साइबर सुरक्षा और राष्ट्रहित पर हुआ मंथन
गोरखपुर, 26 अगस्त 2026। सीमा जागरण मंच, गोरखपुर महानगर के तत्वावधान में बुधवार को “सीमा सुरक्षा में हमारी भूमिका” विषय पर विशेष जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन डिवाइन एकेडमी, बिछिया, गोरखपुर में किया गया। कार्यक्रम में सीमा सुरक्षा, राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता, सामाजिक समरसता, नागरिक जिम्मेदारी और बदलते डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों को राष्ट्रहित से जुड़े विषयों के प्रति जागरूक करना और नागरिकों को अपनी सामाजिक एवं राष्ट्रीय जिम्मेदारियों के प्रति सजग बनाना रहा।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में राष्ट्रीय सुरक्षा का दायरा केवल देश की भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं रह गया है। आज डिजिटल सुरक्षा, सामाजिक एकता, सांस्कृतिक चेतना, युवाओं में राष्ट्रबोध और जिम्मेदार नागरिकता भी राष्ट्रीय सुरक्षा के महत्वपूर्ण पहलू हैं। ऐसे में प्रत्येक नागरिक की जागरूकता राष्ट्र की सुरक्षा और मजबूती में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भारतीय अवधारणा पर हुआ मंथन
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता माननीय श्री रमेश जी, प्रांत प्रवक्ता, गोरक्ष प्रांत ने ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भारतीय अवधारणा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति सदैव संपूर्ण विश्व को एक परिवार के रूप में देखने की भावना को महत्व देती रही है। मानवता, सामाजिक समरसता, राष्ट्रहित और विश्व कल्याण एक-दूसरे के पूरक हैं।
उन्होंने कहा कि एक मजबूत, सुरक्षित और संगठित राष्ट्र ही विश्व शांति और मानव कल्याण में प्रभावी योगदान दे सकता है। राष्ट्र की एकता और अखंडता को मजबूत बनाए रखने के लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।
श्री रमेश जी ने कहा कि सीमा सुरक्षा केवल सीमा पर तैनात सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि देश के प्रत्येक नागरिक का भी नैतिक और सामाजिक दायित्व है। सीमा पर सुरक्षा बल देश की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, वहीं नागरिकों की जागरूकता, राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक चेतना और जिम्मेदार व्यवहार भी देश की आंतरिक मजबूती के लिए आवश्यक है।
उन्होंने उपस्थित लोगों से राष्ट्रहित से जुड़े विषयों के प्रति सजग रहने तथा समाज में राष्ट्रीय चेतना और सामाजिक समरसता को मजबूत करने का आह्वान किया।
महिला साइबर सुरक्षा पर चारु चौधरी ने किया जागरूक
कार्यक्रम की विशिष्ट वक्ता श्रीमती चारु चौधरी जी ने महिला साइबर सुरक्षा के विषय पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने डिजिटल युग में बढ़ती ऑनलाइन गतिविधियों के बीच महिलाओं को साइबर अपराधों के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने ऑनलाइन धोखाधड़ी, फर्जी लिंक, संदिग्ध फोन कॉल और संदेश, फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल तथा निजी एवं बैंकिंग जानकारी के दुरुपयोग से बचने के लिए जागरूक रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने, संदिग्ध व्यक्ति के साथ निजी जानकारी साझा करने या बैंकिंग संबंधी संवेदनशील जानकारी देने से पहले पूरी सावधानी बरतनी चाहिए।
चारु चौधरी ने कहा कि डिजिटल युग में महिलाओं का साइबर रूप से जागरूक और आत्मनिर्भर होना बेहद आवश्यक है। महिलाएं स्वयं साइबर सुरक्षा के नियमों को समझें और परिवार के बच्चों तथा अन्य सदस्यों को भी डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक करें।
उन्होंने कहा कि आज साइबर जागरूकता केवल व्यक्तिगत सुरक्षा का विषय नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा महत्वपूर्ण पहलू बन चुका है। समाज में साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ने से ऑनलाइन अपराधों से बचाव में मदद मिल सकती है।
सीमा सुरक्षा में समाज की भूमिका पर जोर
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में सीमा सुरक्षा का स्वरूप लगातार व्यापक हो रहा है। देश की भौगोलिक सीमाओं की सुरक्षा के साथ-साथ सामाजिक एकता, डिजिटल सुरक्षा, सांस्कृतिक चेतना और युवाओं में राष्ट्रबोध को मजबूत करना भी आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि यदि समाज जागरूक और संगठित रहेगा तो देश की आंतरिक मजबूती भी बढ़ेगी। नागरिकों को अपने आसपास होने वाली गतिविधियों के प्रति सजग रहने, अफवाहों से बचने और राष्ट्रहित से जुड़े विषयों पर जिम्मेदारी के साथ अपनी भूमिका निभाने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम के माध्यम से समाज के प्रत्येक वर्ग से राष्ट्रहित में अपनी भूमिका निभाने और अधिक से अधिक लोगों को सीमा सुरक्षा एवं राष्ट्रीय जागरूकता के अभियान से जोड़ने का आह्वान किया गया।
सैकड़ों कार्यकर्ताओं और गणमान्य लोगों की रही मौजूदगी
कार्यक्रम में सीमा जागरण मंच उत्तर प्रदेश के क्षेत्र संगठन मंत्री श्री सत्यदेव जी, प्रांत अध्यक्ष श्री जितेंद्र पाल जी, शाश्वत जी, श्रीमती ममता जायसवाल जी, कुमकुम सिंह जी, डॉ. आलोक जी, डॉ. देवनारायण जी, डॉ. सतीश द्विवेदी जी, डॉ. तेजस्वी जी, दीप जी, विभाग प्रचारक श्री अजय नारायण जी, विभाग संघचालक श्री शेषनाथ जी, वेदांत जी, श्रीमती चारु चौधरी जी और सुनीषा जी सहित अनेक पदाधिकारी एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
इसके अलावा अखंड हिंद फौज के भैया एवं बहनों तथा सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम में सहभागिता की। उपस्थित लोगों ने राष्ट्र की एकता, अखंडता, सुरक्षा और सामाजिक समरसता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
जनभागीदारी को बताया जन-जागरण की ताकत
सीमा जागरण मंच, गोरखपुर महानगर के महानगर अध्यक्ष श्री J. K. Srivastava ने कार्यक्रम की सफलता के लिए सभी अतिथियों, वक्ताओं, पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और उपस्थित नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि सीमा सुरक्षा के प्रति जन-जागरूकता को घर-घर तक पहुंचाने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को सक्रिय भूमिका निभानी होगी। केवल कार्यक्रमों के आयोजन से जागरूकता का उद्देश्य पूरा नहीं होगा, बल्कि जागरूकता के संदेश को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि जनभागीदारी ही जन-जागरण की सबसे बड़ी शक्ति है। जब नागरिक अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने दायित्वों को समझकर राष्ट्रहित में सक्रिय भूमिका निभाएंगे, तभी एक मजबूत, सुरक्षित और संगठित राष्ट्र का निर्माण संभव होगा।
उन्होंने युवाओं और महिलाओं से विशेष रूप से राष्ट्रीय जागरूकता तथा साइबर सुरक्षा के विषयों को गंभीरता से समझने और अपने आसपास के लोगों को भी जागरूक करने की अपील की।
सामूहिक संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम के अंत में राष्ट्र की एकता, अखंडता, सुरक्षा, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय स्वाभिमान के प्रति सामूहिक संकल्प लिया गया। उपस्थित लोगों ने राष्ट्रहित में अपनी भूमिका निभाने और समाज में जागरूकता का संदेश पहुंचाने का संकल्प व्यक्त किया।
कार्यक्रम का मुख्य संदेश रहा—“आइए, एकजुट हों, जागरूक हों और राष्ट्र की सीमाओं की रक्षा तथा राष्ट्रहित में अपना योगदान दें।”
सीमा जागरण मंच, गोरखपुर महानगर की ओर से आयोजित इस जन-जागरूकता कार्यक्रम में सीमा सुरक्षा के साथ-साथ महिला साइबर सुरक्षा और नागरिक जिम्मेदारी जैसे विषयों को एक साथ जोड़कर समाज को जागरूक करने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि देश की सुरक्षा केवल सीमाओं की रक्षा से नहीं, बल्कि जागरूक, जिम्मेदार और संगठित नागरिक समाज से भी मजबूत होती है।

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