गोरखपुर में ऑनलाइन गेमिंग की आड़ में कथित सट्टेबाजी नेटवर्क का खुलासा, पांच गिरफ्तार
गोरखपुर। ऑनलाइन गेमिंग की आड़ में कथित तौर पर सट्टेबाजी का नेटवर्क संचालित करने वाले गिरोह का शाहपुर पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह दूसरे लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल कथित रूप से म्यूल अकाउंट के तौर पर कर रहा था। इन खातों के जरिए रोजाना लाखों रुपये का लेनदेन किए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि तीन अन्य संदिग्ध अभी फरार बताए जा रहे हैं।
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और बैंकिंग से संबंधित दस्तावेज बरामद किए गए हैं। बरामद सामान में तीन लैपटॉप, 23 मोबाइल फोन, एक मिनी लैपटॉप, तीन टैबलेट, 11 एटीएम कार्ड और 16 बैंक पासबुक शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि इन उपकरणों और दस्तावेजों की जांच से ऑनलाइन गतिविधियों, बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं।
साइबर निगरानी के जरिए पुलिस पहुंची नेटवर्क तक
पुलिस के अनुसार, इस कार्रवाई में साइबर कमांडो उपेंद्र कुमार सिंह की तकनीकी निगरानी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। डिजिटल गतिविधियों और ऑनलाइन लेनदेन से मिले सुरागों का विश्लेषण करने के बाद पुलिस टीम ने कथित नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान की। इसके बाद थाना अध्यक्ष अंजय कुमार सिंह के नेतृत्व में शाहपुर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया।
पुलिस लाइन में आयोजित पत्रकार वार्ता में एसपी सिटी निमिष पाटिल ने मामले की प्रारंभिक जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि जांच में सामने आया है कि आरोपी ऑनलाइन गेमिंग पोर्टल के माध्यम से कथित रूप से सट्टेबाजी का संचालन कर रहे थे। इसके लिए दूसरे लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाए जाते थे और उनका इस्तेमाल पैसों के लेनदेन के लिए किया जाता था।
म्यूल खातों के जरिए लेनदेन का आरोप
पुलिस जांच के अनुसार, कथित नेटवर्क में बैंक खातों की भूमिका अहम थी। आरोप है कि दूसरे लोगों के नाम पर खोले गए खातों में सट्टेबाजी से जुड़ी रकम मंगाई और भेजी जाती थी। इन खातों से हुए लेनदेन की जानकारी जुटाने के लिए पुलिस ने बरामद एटीएम कार्ड, पासबुक, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों को जांच के दायरे में लिया है।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन खातों के जरिए कुल कितनी रकम का लेनदेन हुआ और पैसा किन-किन बैंक खातों तक पहुंचा। इसके साथ ही जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इन बैंक खातों के वास्तविक धारकों की भूमिका क्या थी और उन्हें कथित नेटवर्क से किस तरह जोड़ा गया।
पढ़ाई करने वाले युवाओं के नेटवर्क में शामिल होने का दावा
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में कथित मुख्य सरगना नीतीश सिंह एलएलबी फाइनल ईयर का छात्र बताया गया है। उसके साथ अभय कुमार सिंह, वाजिद चौधरी, साहिल चौधरी और मुन्ना कुमार को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक, ये आरोपी स्नातक स्तर के छात्र बताए गए हैं।
युवाओं के इस तरह के कथित ऑनलाइन नेटवर्क में शामिल होने की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि गिरोह में कितने अन्य युवा जुड़े हुए थे। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि आरोपियों को नेटवर्क में किस तरह की जिम्मेदारी दी गई थी और इसके संचालन का दायरा कितना बड़ा था।
‘रेडी अन्ना’ पोर्टल का पैनल लेने की बात
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि उन्होंने ‘रेडी अन्ना’ नामक ऑनलाइन पोर्टल का पैनल खरीदा था। इसके बाद उसकी ब्रांच के रूप में कार्यालय संचालित कर ऑनलाइन सट्टेबाजी से संबंधित गतिविधियां की जा रही थीं।
आरोप है कि लोगों को अलग-अलग तरह के प्रलोभन देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाए जाते थे। इन खातों से संबंधित एटीएम कार्ड, पासबुक और अन्य बैंकिंग दस्तावेज कथित तौर पर अपने पास रखे जाते थे। इसके बाद इन्हीं खातों के माध्यम से रकम के लेनदेन का संचालन किया जाता था।
हालांकि, पुलिस जांच अभी जारी है और आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
23 मोबाइल और लैपटॉप से खंगाले जा रहे डिजिटल साक्ष्य
पुलिस ने बरामद 23 मोबाइल फोन, लैपटॉप, मिनी लैपटॉप और टैबलेट को जांच के लिए महत्वपूर्ण माना है। इन उपकरणों में मौजूद डिजिटल डाटा, ऑनलाइन गतिविधियों, बैंकिंग संबंधी जानकारी और अन्य रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
जांच का उद्देश्य कथित नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की पहचान करना और डिजिटल लेनदेन की पूरी कड़ी को समझना है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि ऑनलाइन गतिविधियों का संचालन केवल गोरखपुर तक सीमित था या इसके तार दूसरे जिलों और राज्यों से भी जुड़े हुए थे।
तीन फरार आरोपियों की तलाश जारी
पुलिस के मुताबिक, इस मामले में तीन अन्य आरोपी अभी फरार हैं। उनकी तलाश के लिए पुलिस टीमें लगाई गई हैं। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर फरार आरोपियों के संभावित ठिकानों और उनकी भूमिका के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
इसके अलावा बैंक खातों की जांच से यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि कथित नेटवर्क में कितने बैंक खाते इस्तेमाल किए गए और उनसे कितनी धनराशि का लेनदेन हुआ। पुलिस को उम्मीद है कि डिजिटल उपकरणों और बैंकिंग रिकॉर्ड की विस्तृत जांच के बाद मामले में और जानकारी सामने आ सकती है।
पुलिस टीम में ये अधिकारी रहे शामिल
कार्रवाई करने वाली टीम में साइबर कमांडो उपेंद्र कुमार सिंह, थाना अध्यक्ष अंजय कुमार सिंह, उपनिरीक्षक सुभाष चंद्र पांडेय, सत्यम सिंह, चंद्रभान सिंह, सुदीप सिंह समेत शाहपुर थाने के अन्य पुलिसकर्मी शामिल रहे। पत्रकार वार्ता के दौरान सीओ गोरखनाथ रवि कुमार सिंह भी मौजूद रहे।

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