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    राजघाट अंत्येष्टि स्थल के मेन गेट में दरार, प्रशासन ने बढ़ाई सतर्कता

    गोरखपुर। राजघाट स्थित अंत्येष्टि स्थल पर आकाशीय बिजली गिरने से गुंबद का एक हिस्सा गिरने और हादसे में दो अधिवक्ताओं की मौत के बाद जिला प्रशासन ने जर्जर एवं अनुपयोगी भवनों को लेकर व्यापक स्तर पर सुरक्षा अभियान शुरू किया है। प्रशासन अब जिले में ऐसे भवनों को चिह्नित कर उनके संबंध में नियमानुसार कार्रवाई की तैयारी कर रहा है, जिनसे आमजन की सुरक्षा को खतरा हो सकता है।


    जिलाधिकारी दीपक मीणा ने बताया कि राजघाट स्थित अंत्येष्टि स्थल के मुख्य द्वार में भी दरार आने की जानकारी मिली है। इसे देखते हुए नगर निगम की ओर से मुख्य द्वार के पास सावधानी सूचक बोर्ड लगाया गया है। इसका उद्देश्य अंत्येष्टि स्थल पर आने-जाने वाले लोगों को संभावित खतरे के प्रति सचेत करना है। प्रशासन की ओर से क्षतिग्रस्त हिस्से की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।


    मुख्य द्वार की स्थिति पर प्रशासन की नजर

    जिलाधिकारी ने बताया कि अंत्येष्टि स्थल पर हुई घटना के बाद सुरक्षा के दृष्टिकोण से आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्य द्वार में आई दरार की भी जांच और स्थिति का आकलन कराया जा रहा है। यदि निरीक्षण के दौरान यह पाया जाता है कि मुख्य द्वार को दोबारा बनाना आवश्यक है, तो नियमानुसार उसके पुनर्निर्माण की कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल लोगों की सुरक्षा को देखते हुए मौके पर सावधानी सूचक बोर्ड लगाया गया है, ताकि लोग क्षतिग्रस्त हिस्से के आसपास अनावश्यक रूप से न जाएं और किसी संभावित दुर्घटना से बचा जा सके।


    नगर निगम ने 200 जर्जर भवन किए चिह्नित

    राजघाट की घटना के बाद प्रशासन ने जिले के पुराने और कमजोर भवनों की स्थिति की समीक्षा शुरू कर दी है। जिलाधिकारी के अनुसार, नगर निगम क्षेत्र में करीब 200 जर्जर एवं अनुपयोगी भवनों को चिह्नित किया गया है। इन भवनों की स्थिति के आधार पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

    प्रशासन का उद्देश्य केवल पुराने भवनों की सूची तैयार करना नहीं है, बल्कि ऐसे भवनों की वास्तविक स्थिति का परीक्षण कर समय रहते सुरक्षा संबंधी कदम उठाना है। जिन भवनों की संरचना कमजोर हो चुकी है और जिनसे लोगों की जान-माल को खतरा हो सकता है, उनके संबंध में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    कुछ भवनों को सुरक्षित बनाया जा सकता है, जबकि अत्यधिक जर्जर और खतरनाक भवनों को नियमानुसार ध्वस्त कराने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।


    नगर पंचायतों में भी शुरू होगी जर्जर भवनों की पहचान

    नगर निगम के साथ अब जिले की नगर पंचायतों में भी जर्जर एवं अनुपयोगी भवनों की पहचान की जाएगी। जिलाधिकारी ने सभी नगर पंचायतों के अधिशासी अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में ऐसे भवनों को चिह्नित करने के निर्देश दिए हैं।

    अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने क्षेत्र में पुराने, जर्जर और लंबे समय से अनुपयोगी भवनों का निरीक्षण करें। इसके बाद उनकी स्थिति के आधार पर सूची तैयार कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

    प्रशासन विशेष रूप से उन भवनों पर नजर रखेगा, जो बाजार, सार्वजनिक स्थानों, मुख्य मार्गों, आबादी वाले क्षेत्रों या अन्य ऐसे स्थानों पर स्थित हैं, जहां लोगों की आवाजाही अधिक रहती है। ऐसे स्थानों पर जर्जर भवन गिरने की स्थिति में जनहानि का खतरा अधिक हो सकता है।


    केवल चिह्नित करने तक सीमित न रहे कार्रवाई

    जिलाधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जर्जर भवनों को केवल चिह्नित करके कार्रवाई समाप्त न मानी जाए। प्रत्येक भवन की वास्तविक स्थिति का परीक्षण कराया जाए और खतरे के स्तर के अनुसार आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

    यदि किसी भवन को तत्काल हटाना या ध्वस्त करना आवश्यक है तो उसके संबंध में नियमानुसार प्रक्रिया पूरी की जाए। वहीं, जहां तत्काल ध्वस्तीकरण संभव नहीं है, वहां लोगों की सुरक्षा के लिए वैकल्पिक उपाय किए जाएं। जरूरत पड़ने पर खतरनाक हिस्से को घेरने, लोगों की आवाजाही रोकने और चेतावनी बोर्ड लगाने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।

    प्रशासन का जोर इस बात पर है कि किसी संभावित दुर्घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले ही खतरे की पहचान कर उसे दूर किया जाए।


    संभावित खतरे वाले स्थानों पर लगाए जाएंगे चेतावनी बोर्ड

    जिलाधिकारी ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया है कि जिन स्थानों पर जर्जर भवन या क्षतिग्रस्त संरचना से खतरा है, वहां आमजन को सतर्क करने के लिए आवश्यकतानुसार चेतावनी अथवा सावधानी सूचक बोर्ड लगाए जाएं।

    इसके साथ ही संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया गया है, ताकि भवनों की पहचान से लेकर निरीक्षण और नियमानुसार कार्रवाई तक की प्रक्रिया प्रभावी ढंग से पूरी हो सके।


    जनसुरक्षा को बताया सर्वोच्च प्राथमिकता

    जिलाधिकारी दीपक मीणा ने कहा कि आमजन की सुरक्षा जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी जर्जर अथवा अनुपयोगी भवन के कारण जनहानि की स्थिति उत्पन्न नहीं होनी चाहिए। इसी उद्देश्य से नगर निगम और नगर पंचायतों को अपने-अपने क्षेत्रों में ऐसे भवनों को चिह्नित करने और उनकी स्थिति के अनुसार नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

    राजघाट अंत्येष्टि स्थल पर हुए हादसे के बाद प्रशासन की यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि पुराने और कमजोर भवनों की समय रहते पहचान होने से संभावित दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है। नगर निगम क्षेत्र में चिह्नित करीब 200 भवनों के साथ अब नगर पंचायत क्षेत्रों में भी सर्वे कराया जाएगा। प्रशासन की निगरानी में होने वाली इस कार्रवाई का उद्देश्य जिले में जर्जर संरचनाओं से जुड़े संभावित जोखिम को कम करना और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

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