बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने दिया घाट पर जल चढ़ावा, सुरक्षा-व्यवस्था रही मुस्तैद
आज सुबह से ही बिसरा घाट के पास सरयू नदी के तट पर मौजूद गोलाबाज़ार-क्षेत्र में आश्चर्यजनक उत्साह देखा गया। कार्तिक पूर्णिमा नहान पर भक्तों की भारी भीड़ घाट पर उमड़ी, उन्होंने शुद्ध नदी-जल में स्नान किया, जल चढ़ावा दिया और पूजा-अनुष्ठान किए। इस धार्मिक और सामाजिक अवसर पर स्थानीय पुलिस-प्रशासन ने विशेष सुरक्षा व निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित की ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो सके।
आस्था में डूबे श्रद्धालु
भोर होते ही सरयू तट पर लोगों का तांता लग गया। दूर-दराज़ के गांवों से लोग परिवार सहित पहुंचे। श्रद्धालुओं ने नदी में स्नान कर पवित्र जल से पूजा की और भगवान की आराधना की। घाट पर "जय सरयू मइया" और "हर हर महादेव" के जयकारे लगातार गूंजते रहे। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक श्रद्धा में डूबे दिखे। महिलाओं ने कलश और फूल-माला लेकर नदी तट पर विशेष पूजा-अर्चना की।
प्रशासनिक व्यवस्था रही कड़ी
बड़ी संख्या में उमड़ी भीड़ को देखते हुए पुलिस-प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। थाना गोला के प्रभारी निरीक्षक के नेतृत्व में पूरी टीम ने घाट की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन का जिम्मा संभाला। सुरक्षा व्यवस्था में उपनिरीक्षक आशीष सिंह, कांस्टेबल इंद्रजीत शाह, राकेश यादव और प्रियंका गौतम सहित कई पुलिसकर्मी तैनात रहे। उन्होंने घाट के चारों ओर गश्त कर सभी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी। पुलिस कर्मियों ने श्रद्धालुओं को सावधानीपूर्वक स्नान करने और नदी में अधिक अंदर न जाने की अपील की।
व्यवस्था की सराहना
श्रद्धालुओं ने बताया कि इस बार घाट पर स्वच्छता और सुरक्षा की बेहतर व्यवस्था रही। प्रशासन ने पहले ही घाट की सफाई कराई थी और अस्थायी प्रकाश व्यवस्था भी की गई थी। महिलाओं और बुजुर्गों के लिए अलग-अलग स्नान स्थल बनाए गए थे ताकि किसी प्रकार की असुविधा न हो।
भीड़ नियंत्रण और राहत व्यवस्था
गोला प्रशासन ने एंबुलेंस, गोताखोर दल और फायर सर्विस की टीमों को भी घाट के आसपास तैनात रखा। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए कंट्रोल रूम भी सक्रिय रहा। पुलिस कर्मियों ने बच्चों को भीड़ में सुरक्षित रखने की हिदायत दी और यातायात व्यवस्था सुचारू बनाए रखी।
धार्मिक और सामाजिक महत्त्व
सरयू नदी का धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्व है। पौराणिक मान्यता है कि इस नदी में स्नान करने से पापों का क्षय होता है और मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है। स्थानीय पुजारियों के अनुसार यह पर्व हर वर्ष कार्तिक महीने में श्रद्धा-पूर्वक मनाया जाता है, जिसे "नाहन" कहा जाता है।

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