1962 की टीम ने पशुओं को ठंड से बचाव हेतु लगाया जागरूकता कैम्प
बेलघाट ब्लॉक के छितौनी बुजुर्ग ग्राम में 1962 की टीम द्वारा पशुपालकों को ठंड के मौसम में पशुओं की सुरक्षा एवं देखभाल को लेकर जागरूक करने के उद्देश्य से एक विशेष कैम्प का आयोजन किया गया। इस कैम्प में बड़ी संख्या में स्थानीय पशुपालकों ने भाग लिया और पशुओं को ठंड से बचाने के आवश्यक उपायों की जानकारी प्राप्त की।
कैम्प के दौरान टीम के सदस्यों ने बताया कि ठंड का मौसम दुधारू पशुओं के लिए अत्यंत संवेदनशील होता है। यदि इस समय पशुओं की उचित देखभाल न की जाए तो उन्हें ठंड लगने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे उनकी दूध उत्पादन क्षमता में कमी आ सकती है। साथ ही पशुओं में विभिन्न बीमारियों के होने की संभावना भी बढ़ जाती है, जिसका सीधा असर पशुपालकों की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है।
टीम द्वारा पशुपालकों को बताया गया कि सर्दी के मौसम में पशुओं के लिए विशेष प्रबंध करना अत्यंत आवश्यक है। पशुओं को खुले स्थानों पर न रखें, बल्कि उन्हें ढके और सुरक्षित स्थानों में रखें। पशुगृह की खिड़कियों और दरवाजों को टाट, बोरे या मोटे कपड़े से ढकने की सलाह दी गई, ताकि ठंडी हवा सीधे अंदर न आ सके। इसके साथ ही पशुओं को ठंड से बचाने के लिए सूखी और साफ बिछावन का उपयोग करने पर भी जोर दिया गया।
कैम्प में यह भी बताया गया कि पशुओं को समय-समय पर ताजा और स्वच्छ पानी पिलाना चाहिए तथा उनके खान-पान की उचित व्यवस्था करनी चाहिए। संतुलित आहार देने से पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और वे ठंड के प्रभाव से सुरक्षित रहते हैं। इसके अलावा पशुगृह में मूत्र और गोबर की निकासी की उचित व्यवस्था रखने की सलाह दी गई, जिससे गंदगी न फैले और संक्रमण का खतरा कम हो।
1962 की टीम ने पशुपालकों से अपील की कि वे सर्दी के मौसम में पशुओं की नियमित निगरानी करें और किसी भी प्रकार की बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें। कैम्प के माध्यम से पशुपालकों को ठंड से बचाव के सरल और प्रभावी उपायों की जानकारी देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया गया।
स्थानीय पशुपालकों ने इस कैम्प की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में अत्यंत आवश्यक हैं, जिससे पशुओं की सेहत के साथ-साथ पशुपालकों की आय भी सुरक्षित रह सके।

No comments