बड़हलगंज में राष्ट्र जागरण नारी सशक्तिकरण महायज्ञ का तीसरा दिन, घने कोहरे में भी उमड़ा आस्था का सैलाब
बड़हलगंज। राष्ट्रीय कन्या इंटर कॉलेज के विशाल मैदान में आयोजित राष्ट्र जागरण नारी सशक्तिकरण 108 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ के तीसरे दिन भी श्रद्धा, आस्था और तप का अद्भुत संगम देखने को मिला। घने कोहरे और भीषण ठंड के बावजूद हजारों की संख्या में श्रद्धालु यज्ञ स्थल पर पहुंचे और पूरे विधि-विधान के साथ आहुतियां प्रदान कर लोक कल्याण, परिवार कल्याण एवं युग निर्माण की मंगल कामना की।
मंगलवार को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार शांतिकुंज हरिद्वार से पधारी ब्रह्मवादिनी बहनों की टोली के मार्गदर्शन में यज्ञ संपन्न कराया गया। टोली की मुखिया श्यामा राठौर ने वेद मंत्रों एवं गायत्री महामंत्र के भावपूर्ण उच्चारण के साथ उपस्थित श्रद्धालुओं को यज्ञ की महिमा, उसके आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि यज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र को सकारात्मक दिशा देने का सशक्त माध्यम है। यज्ञ में दी जाने वाली आहुतियां व्यक्ति के जीवन से नकारात्मकता दूर कर सद्गुणों का विकास करती हैं।
तीसरे दिन का दृश्य किसी महाकुंभ से कम नहीं रहा। गायत्री साधकों की भारी उपस्थिति के कारण यज्ञ स्थल पर आध्यात्मिक ऊर्जा का विशेष अनुभव किया गया। श्रद्धालुओं ने अनुशासनबद्ध तरीके से यज्ञ में भाग लिया और मंत्रोच्चार के साथ आहुतियां दीं। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की सक्रिय सहभागिता ने नारी सशक्तिकरण के उद्देश्य को और अधिक सशक्त रूप में प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में ब्रह्मवादिनी अरुंधती शाह, मंदाकिनी तिवारी, लक्ष्मी साहू, विजयलक्ष्मी यादव, संगीता चंद्राकर सहित पूरी टोली का विशेष योगदान रहा। वहीं आयोजन को सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने में कार्यक्रम संयोजक लक्ष्मीनारायण गुप्त, सुभाष विश्वकर्मा, अनिल कुमार पाण्डेय, चेयरमैन प्रतिनिधि महेश उमर, राधेश्याम कुशवाहा, वीरेंद्र नारायण गुप्ता, राजीव दूबे, डॉ. बांके बिहारी मिश्रा, बसंत गुप्ता, पुरुषोत्तम जायसवाल, मीडिया प्रभारी संतोष जायसवाल सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इसके अतिरिक्त गीता कुशवाहा, अतरवासी देवी, संध्या श्रीवास्तव, संध्या जायसवाल, मीरा जायसवाल, विजयलक्ष्मी जायसवाल, पवन यादव, डॉ. ए.के. गुप्ता और डॉ. अरुणा अग्रवाल के सहयोग से कार्यक्रम को व्यापक जनसमर्थन मिला। आयोजन स्थल पर अनुशासन, स्वच्छता और सेवा भाव का वातावरण बना रहा, जिसने यज्ञ को एक यादगार आध्यात्मिक आयोजन बना दिया।
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