मैं सेक्युलर लोगों से नहीं डरता: बाल विवाह और जनसंख्या नीति पर बोले हिमंत बिस्वा सरमा
गुवाहाटी। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बाल विवाह, बहुविवाह और जनसंख्या नियंत्रण से जुड़े मुद्दों पर सख्त रुख दोहराया है। एक सार्वजनिक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि बाल विवाह पर रोक लगाना पूरी तरह संवैधानिक कदम है और राज्य सरकार इस दिशा में पहले ही ठोस कार्रवाई कर चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि वे किसी भी तरह के दबाव से नहीं डरते और सामाजिक सुधार के लिए आवश्यक फैसले लेते रहेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि असम सरकार ने बाल विवाह पर सख्ती से रोक लगाने के लिए कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर अभियान चलाया है। उनके अनुसार, यह कदम महिलाओं और बच्चियों के अधिकारों की रक्षा तथा शिक्षा और स्वास्थ्य के बेहतर अवसर सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाल विवाह जैसी प्रथा समाज के विकास में बाधा है और इसे समाप्त करना सरकार की प्राथमिकता है।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने बहुविवाह के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि राज्य में ऐसा नियम बनाया गया है कि कोई भी व्यक्ति दो या तीन विवाह नहीं कर सकता। उनका कहना था कि कानून सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होना चाहिए और सामाजिक संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
जनसंख्या नियंत्रण के विषय में उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में और सख्त कदम उठाए जा सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ऐसी नीति पर विचार कर रही है, जिसके तहत तीन या उससे अधिक बच्चों वाले परिवारों को कुछ सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित किया जा सकता है। हालांकि इस प्रस्ताव पर अभी विस्तृत नीति और कानूनी प्रक्रिया पूरी की जानी बाकी है।
मुख्यमंत्री के इन बयानों के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। समर्थकों का कहना है कि ये कदम सामाजिक सुधार और संसाधनों के संतुलित वितरण के लिए आवश्यक हैं, जबकि कुछ विपक्षी दलों ने इन प्रस्तावों पर सवाल उठाए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी नई नीति को लागू करने से पहले व्यापक कानूनी समीक्षा और सामाजिक संवाद जरूरी होता है। फिलहाल असम सरकार की ओर से संकेत दिया गया है कि सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा और कानून के दायरे में रहकर आवश्यक फैसले लिए जाएंगे।

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