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    गीडा औद्योगिक क्षेत्र से प्रदूषण का खतरा: आमी से राप्ती नदी तक गंदे पानी का प्रवाह, ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई गुहार

    गोरखपुर, उत्तर प्रदेश:

    गोरखपुर जनपद के गीडा औद्योगिक क्षेत्र से निकलने वाले अपशिष्ट और गंदे पानी के कारण आमी और राप्ती नदियों के प्रदूषण का मामला गंभीर होता जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि औद्योगिक इकाइयों की लापरवाही के चलते बिना शोधन का कचरा सीधे नदियों में छोड़ा जा रहा है, जिससे जल गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है और आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा बढ़ गया है।


    जानकारी के अनुसार, गीडा क्षेत्र से निकलने वाला दूषित पानी पहले आमी नदी में प्रवेश करता है और फिर कौड़ीराम-सोहगौरा के रास्ते राप्ती नदी में मिल जाता है। यह प्रवाह सहजनवा से लगभग 60 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए गजपुर, कोठा और बेलकुर जैसे गांवों से होकर आगे सरयू नदी की दिशा में बढ़ रहा है। इस पूरी प्रक्रिया में कई गांव प्रभावित हो रहे हैं, जहां के निवासियों को प्रदूषण के कारण विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।


    स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि नदियों के किनारे बसे गांवों में स्थिति दिन-प्रतिदिन खराब होती जा रही है। नदी के पानी में बढ़ती गंदगी और दुर्गंध के कारण लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है। कई स्थानों पर जलजनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से आधिकारिक पुष्टि की प्रतीक्षा है, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार हालात चिंताजनक बने हुए हैं।


    पर्यावरणीय दृष्टि से भी यह स्थिति गंभीर मानी जा रही है। नदी में प्रदूषित पानी के प्रवाह के कारण जलीय जीवों पर असर पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि कई जगहों पर मछलियों और अन्य जीव-जंतुओं की मौत की घटनाएं सामने आई हैं। इससे मछुआ समुदाय के सामने आजीविका का संकट भी खड़ा हो गया है, क्योंकि उनकी आय का प्रमुख स्रोत प्रभावित हो रहा है।

    इसी मुद्दे को लेकर आज ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने जिला प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए जिलाधिकारी कार्यालय में ज्ञापन सौंपा। जिलाधिकारी की अनुपस्थिति में प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात सिटी मजिस्ट्रेट गोरखपुर उत्कर्ष श्रीवास्तव से हुई। प्रतिनिधियों ने उन्हें समस्या की गंभीरता से अवगत कराया और तत्काल प्रभाव से नदियों में गंदे पानी के प्रवाह को रोकने की मांग की।

    ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और गंभीर हो सकती है, जिससे पर्यावरण और जनस्वास्थ्य दोनों पर व्यापक असर पड़ सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से औद्योगिक इकाइयों की नियमित जांच, अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था सुनिश्चित करने और दोषी इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

    सिटी मजिस्ट्रेट ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि मामले की जांच कर संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे। प्रशासन की ओर से यह भी कहा गया कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए नियमों का पालन सुनिश्चित कराया जाएगा और शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा।

    फिलहाल, स्थानीय लोग प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना है कि नदियों की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के लिए त्वरित कदम उठाना आवश्यक है, ताकि आने वाले समय में इस तरह की समस्याओं से बचा जा सके।

    (नोट: यह रिपोर्ट स्थानीय लोगों द्वारा दी गई जानकारी और प्रशासनिक मुलाकात के आधार पर तैयार की गई है। आधिकारिक जांच रिपोर्ट का इंतजार है।)

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