रसोईया कांति देवी के निधन पर शोक संवेदना, पुत्री को दी 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता
उरुवा, गोरखपुर। प्राथमिक विद्यालय लोहरा मीरा, उरुवा में कार्यरत रसोईया कांति देवी के निधन से परिवार और विद्यालय परिवार में शोक की लहर है। लंबी बीमारी के बाद 14 अगस्त 2026 को कांति देवी का निधन हो गया। उनके निधन की जानकारी मिलने के बाद शिक्षक, समाजसेवी और स्थानीय लोग शोकाकुल परिवार के घर पहुंचे और परिजनों को ढांढस बंधाया। इस दौरान दिवंगत कांति देवी की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए परिवार को इस कठिन समय में धैर्य रखने का संबल दिया गया।
कांति देवी प्राथमिक विद्यालय लोहरा मीरा में रसोईया के रूप में अपनी सेवाएं दे रही थीं। विद्यालय से जुड़े लोगों के अनुसार वह विद्यालय परिवार का महत्वपूर्ण हिस्सा थीं। उनके निधन से विद्यालय से जुड़े शिक्षक एवं अन्य कर्मचारियों में भी शोक का माहौल है। बीमारी के बाद उनके निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। ऐसे समय में शिक्षकों और समाजसेवियों ने परिवार के साथ खड़े होकर मानवीय संवेदना का परिचय दिया।
शोकाकुल परिवार से मिले शिक्षक और समाजसेवी
मृतका के निधन की सूचना पर प्राथमिक शिक्षक संघ उरुवा के पूर्व ब्लॉक मंत्री रत्नसेन सिंह, शिक्षक एवं वरिष्ठ समाजसेवी शिव कुमार ओझा, शिक्षक उमेश पाल, बालेंद्र यादव, सुनील सिंह तथा देवेंद्र उनके घर पहुंचे। सभी ने शोक संतप्त परिजनों से मुलाकात की और कांति देवी के निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त की।
शिक्षकों और समाजसेवियों ने परिजनों से बातचीत कर उन्हें इस दुख की घड़ी में हिम्मत बनाए रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि किसी अपने को खोने का दुख बेहद कठिन होता है। ऐसे समय में परिवार को भावनात्मक सहयोग और साथ की जरूरत होती है। उपस्थित लोगों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और ईश्वर से शोकाकुल परिवार को इस कठिन परिस्थिति से उबरने की शक्ति देने की कामना की।
आपसी सहयोग से जुटाए 10 हजार रुपये
शोक संवेदना व्यक्त करने के साथ ही शिक्षकों और समाजसेवियों ने परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए मदद का भी प्रयास किया। सभी ने आपसी सहयोग से 10 हजार रुपये की धनराशि एकत्रित की। यह आर्थिक सहायता कांति देवी की पुत्री राधा को प्रदान की गई।
सहयोगकर्ताओं ने कहा कि किसी परिवार पर अचानक विपत्ति आने पर उसके साथ खड़ा होना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। आर्थिक सहायता भले ही छोटी हो, लेकिन संकट के समय इससे परिवार को तत्काल राहत मिल सकती है। उन्होंने कहा कि इस सहयोग का उद्देश्य परिवार की जरूरतों में कुछ मदद करना और यह संदेश देना है कि दुख की घड़ी में परिवार अकेला नहीं है।
दुख की घड़ी में साथ खड़ा होना नैतिक जिम्मेदारी
इस अवसर पर शिक्षक एवं वरिष्ठ समाजसेवी शिव कुमार ओझा ने कहा कि कांति देवी विद्यालय परिवार का महत्वपूर्ण हिस्सा थीं। उनके निधन से हुई क्षति की भरपाई संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि विद्यालय में कार्यरत प्रत्येक व्यक्ति का अपना महत्व होता है और कांति देवी ने भी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए विद्यालय परिवार से जुड़कर सेवाएं दीं।
शिव कुमार ओझा ने कहा कि किसी परिवार के सामने जब विपरीत परिस्थिति आती है तो केवल संवेदना व्यक्त करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सामर्थ्य के अनुसार उसके साथ खड़ा होना भी जरूरी है। इसी भावना के तहत शिक्षकों और समाजसेवियों ने मिलकर मृतका की पुत्री को आर्थिक सहायता प्रदान की है। उन्होंने कहा कि यह सहयोग परिवार को तत्काल कुछ राहत देने का छोटा सा प्रयास है।
विद्यालय परिवार में भी शोक का माहौल
कांति देवी के निधन से प्राथमिक विद्यालय लोहरा मीरा में भी शोक का वातावरण है। विद्यालय से लंबे समय से जुड़ी होने के कारण शिक्षक और विद्यालय से जुड़े लोग उन्हें परिचित और सहयोगी के रूप में जानते थे। उनके निधन की खबर से विद्यालय परिवार में शोक की भावना है।
शिक्षकों ने कहा कि विद्यालय में रसोईया की भूमिका केवल भोजन तैयार करने तक सीमित नहीं होती, बल्कि वह बच्चों और विद्यालय परिवार के बीच रोजमर्रा के कामकाज का अहम हिस्सा होती हैं। कांति देवी भी विद्यालय की व्यवस्थाओं में अपनी भूमिका निभाती थीं। उनके निधन से विद्यालय परिवार ने एक सहयोगी सदस्य को खो दिया है।
जरूरतमंद परिवारों की मदद का संदेश
कांति देवी के निधन के बाद उनके परिवार को दी गई आर्थिक सहायता सामाजिक सहयोग और मानवीय संवेदना का उदाहरण है। शिक्षकों और समाजसेवियों ने कहा कि समाज में जब कोई परिवार बीमारी, मृत्यु या अन्य विपरीत परिस्थितियों से गुजरता है तो आसपास के लोगों का सहयोग उसे मानसिक और आर्थिक रूप से संभलने में मदद करता है।
उन्होंने कहा कि सामूहिक सहयोग की भावना को आगे बढ़ाने की जरूरत है, ताकि जरूरत के समय कोई भी परिवार खुद को अकेला महसूस न करे। कांति देवी के परिवार को दी गई सहायता भी इसी सोच का हिस्सा है।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने दिवंगत कांति देवी की आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। साथ ही शोकाकुल परिजनों को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की। शिक्षकों और समाजसेवियों ने परिवार को भरोसा दिलाया कि वे आगे भी यथासंभव उनके साथ खड़े रहेंगे।
स्थानीय स्तर पर शिक्षकों और समाजसेवियों की यह पहल न केवल दिवंगत कांति देवी के प्रति श्रद्धांजलि है, बल्कि संकट की घड़ी में जरूरतमंद परिवारों की मदद करने और सामाजिक जिम्मेदारी निभाने का सकारात्मक संदेश भी देती है।

No comments