पंचदेव मेला समिति पाली खास में दशमी पर भव्य आयोजन, रावण दहन और रामलीला ने खींची श्रद्धालुओं की भीड़
गोरखपुर। शारदीय नवरात्र के समापन अवसर पर विजयादशमी के शुभ पर्व पर बांसगांव क्षेत्र के पाली खास ग्राम सभा में पंचदेव मेला समिति द्वारा भव्य मेले का आयोजन किया गया। यह परंपरागत मेला सैकड़ों वर्षों से लगातार आयोजित होता आ रहा है, जिसमें आसपास के दर्जनों गांवों से श्रद्धालु और दर्शक भारी संख्या में शामिल होते हैं। इस बार भी दशमी के दिन मेले में उमड़ी भीड़ ने आयोजन को विशेष बना दिया।
मेले का मुख्य आकर्षण राम-रावण युद्ध और रावण दहन कार्यक्रम रहा। आयोजन के दौरान मंच पर राम, लक्ष्मण, हनुमान और रावण का नाट्य मंचन किया गया, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। रामायण के इस जीवंत प्रदर्शन को देखने के लिए दूर-दराज से आए लोग देर रात तक जमे रहे। रावण के पुतले दहन होते ही "जय श्रीराम" के जयघोष से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा।
आयोजन में ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी
मेला समिति के इस आयोजन की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान माधुरी देवी और समिति अध्यक्ष सुधाकर राय ने निभाई। उनके साथ-साथ आयोजन को सफल बनाने में प्रमुख सहयोगी के रूप में विपिन राय, संतोष राय, विशाल राय, रमेश राय और अन्य ग्रामीण साथी सक्रिय रूप से जुड़े रहे। सभी ने मिलकर मंचन, झांकियों और रावण दहन की व्यवस्थाओं को सफलतापूर्वक संपन्न कराया।
ग्रामीणों का कहना है कि यह मेला केवल धार्मिक उत्सव नहीं बल्कि सामाजिक मेल-मिलाप का भी महत्वपूर्ण अवसर है। हर साल दशमी पर यहां लोग अपने परिवार और मित्रों के साथ पहुंचकर श्रद्धा और उत्साह के साथ इस परंपरा को जीवित रखते हैं।
सैकड़ों वर्षों से चल रही परंपरा
पाली खास का पंचदेव मेला क्षेत्र की पहचान बन चुका है। ग्रामीण बताते हैं कि इस मेले का आयोजन कई पीढ़ियों से होता चला आ रहा है। पहले यह मेला सीमित स्तर पर होता था, लेकिन समय के साथ इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ी है। आज यह मेला आसपास के गांवों और कस्बों से भीड़ खींचने वाला प्रमुख आयोजन बन गया है।
विशेष बात यह है कि दशहरा पर्व पर जब देशभर में रावण दहन की परंपरा निभाई जाती है, उसी कड़ी में यह मेला भी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए है। यहां आने वाले लोग इसे मात्र एक आयोजन नहीं बल्कि आस्था और संस्कृति का संगम मानते हैं।
श्रद्धालुओं की अपार भीड़
इस वर्ष भी मेले में सुबह से ही लोगों की आवाजाही शुरू हो गई थी। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने मेले का आनंद लिया। दुकानें, झूले और खिलौनों की चहल-पहल ने वातावरण को और भी उत्सवमय बना दिया। शाम ढलते ही मंचन और रावण दहन कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
रावण का पुतला जलते ही आतिशबाजी और पटाखों की गूंज से पूरा इलाका रोशन हो उठा। बच्चे और युवा उत्साह से झूम उठे। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया गया था ताकि भीड़ में किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।
आस्था और संस्कृति का संगम
पाली खास का यह दशहरा मेला धार्मिक मान्यता और सामाजिक एकता का प्रतीक है। यहां हर वर्ग और हर उम्र के लोग एक साथ शामिल होकर न केवल श्रीराम की लीला का दर्शन करते हैं बल्कि भारतीय संस्कृति की गहराई को भी महसूस करते हैं। यही कारण है कि दशकों से यह परंपरा बिना रुके आगे बढ़ती चली आ रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि आने वाले समय में मेला और भी भव्य स्तर पर आयोजित किया जाएगा ताकि अगली पीढ़ियां भी अपनी संस्कृति से जुड़ी रहें।
इस प्रकार पंचदेव मेला समिति, पाली खास का दशमी पर्व इस बार भी पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। रावण दहन, रामलीला मंचन और उमड़ी भारी भीड़ ने इस आयोजन को अविस्मरणीय बना दिया।


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