छुआछूत सबसे बड़ा पाप, सामाजिक समरसता से ही सुरक्षित होगा राष्ट्र – मनोज जी
संवाददाता सूरज शर्मा बड़हलगंज गोरखपुर
बड़हलगंज।
देश और समाज की मजबूती के लिए आवश्यक है कि प्रत्येक हिंदू समाज में व्याप्त छुआछूत जैसी कुरीतियों को समाप्त करने का संकल्प ले। छुआछूत को मानने वालों को भगवान कभी क्षमा नहीं करते, यह सबसे बड़ा पाप है। उक्त विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के क्षेत्र संपर्क प्रमुख मनोज जी ने सोमवार को बड़हलगंज स्थित रामलीला मैदान में आयोजित हिंदू सम्मेलन को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
मनोज जी ने भगवान श्रीराम और शबरी प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम ने शबरी के जूठे बेर स्वीकार कर यह संदेश दिया कि समाज में सभी मनुष्य समान हैं। दुर्भाग्यवश, राम को मानने वालों के देश में समय के साथ छुआछूत जैसी कुरीतियां पनप गईं, जिससे समाज विभाजन और धर्मांतरण के कुचक्र में फंसता चला गया। उन्होंने कहा कि जाति, भाषा या संपत्ति के आधार पर किसी व्यक्ति का मूल्यांकन नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने राष्ट्र, परिवार और समाज पर विचार रखते हुए कहा कि सामाजिक समरसता ही किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत होती है। यदि समाज में भेदभाव रहेगा तो राष्ट्र कभी मजबूत नहीं हो सकता। संघ की कार्यशैली पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि नागपुर की एक छोटी शाखा से शुरू हुआ संघ आज पूरे देश में हिंदू एकता और सामाजिक समरसता का संदेश फैला रहा है। सामाजिक एकता की पहली शर्त है—मन से भेदभाव को समाप्त करना और हर व्यक्ति को अपना मानना।
सम्मेलन को विचित्र वीर्य हनुमान मंदिर के महंत राजकिशोर दास ने संबोधित करते हुए कहा कि सनातन संस्कृति का मूल ही समरसता और करुणा है। ब्रह्माकुमारी रेखा दीदी ने कहा कि समाज में सकारात्मक सोच और आध्यात्मिक जागरूकता से ही कुरीतियों को समाप्त किया जा सकता है। संजीव कुमार ने युवाओं से सामाजिक एकता के लिए आगे आने का आह्वान किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता हरपाल दास नागवानी ने की, जबकि संचालन वेदव्रत मिश्र ने किया। इस अवसर पर संघ प्रांत प्रचारक डॉ. अवधेश जी, प्रांत सह संपर्क प्रमुख रविभूषण जी, जिला प्रचारक दीपक जी, जिला कार्यवाह पवन यादव, सह जिला कार्यवाह शुकदेव मिश्र, प्रचारक आकाश जी, कृष्ण कुमार गुप्ता, जी सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
हिंदू सम्मेलन में समाज से छुआछूत, भेदभाव और कुरीतियों को समाप्त कर एकजुट भारत के निर्माण का संकल्प लिया गया।
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